लखनऊ। आशा कार्यकत्रियों को कैंसर पहचान का प्रशिक्षण देकर इसे पहले ही स्टेज में रोका जा सकता है। पहले स्टेज में पहचान से इसके इलाज का खर्च कम होगा और ज्यादा से ज्यादा मरीजों की जान बचा सकेंगे। यह जानकारी असम में कैसर मरीजों के इलाज पर नया मॉडल तैयार करने वाले और छार हॉस्पिटल एवं रिसर्च सेंटर असम के निदेशक पद्मश्री डॉ. रवि कानन ने दी। वह मंगलवार को एसजीपीजीआई के स्थापना दिवस समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
असम के ग्रामीण इलाके में कैंसर रोगियों के लिए सेटेलाइट सेंटर स्थापित कर उपचार करने वाले डॉ. कानन ने वर्चुअल संबोधन में अपने मॉडल के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कैंसर के 80 फीसदी मामले अस्पताल तक तब पहुंचते हैं, जब मरीज तीसरे और चौथे स्टेज में आ जाते हैं। ऐसे में उसका उपचार महंगा हो जाता है और तमाम प्रयास के बाद भी जान नहीं बचती। यदि आशा कार्यकत्रियों को कैंसर के लक्षण के बारे में जानकारी दे दी जाए तो उनके जरिए मरीजों को भी जागरूक किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि असम में आशा के सहयोग से 1360 पुरुष की मुंह, गले के कैंसर की स्क्त्रस्ीनिंग की गई, जिसमें 6.93 फीसदी में कैंसर की आशंका मिली। इसी तरह 3079 महिलाओं का आशा ने स्तन कैंसर, सर्विक्स कैंसर की स्क्रीनिंग में 11.5 फीसदी में लक्षण मिले। वहीं, 1160 महिलाओं में 146 में ह्यूमन पैपिलोमा वायरस से होने वाला सर्विक्स कैंसर मिला। उन्होंने कहा कि इस प्राइमरी स्क्रीनिंग मॉडल को लागू कर नान कम्युनिकेबल डिजीज और कैंसर का आसानी से पता लगाया जा सकता है। स्थापना दिवस समारोह से पहले अस्पताल के मरीजों को फल वितरित किया गया और पौधरोपण हुआ। इस दौरान संस्थान के कर्मचारियों ने रक्तदान किया। समारोह में सभी संकाय सदस्य मौजूद रहे।
सामूहिक प्रयास से कोविड पर मिली सफलता : तिवारी
मुख्य सचिव एवं एसजीपीजीआई के अध्यक्ष आरके तिवारी ने कहा कि प्रदेश में डेढ़ साल से कोविड बना हुआ है। सामूहिक प्रयास से इसे काबू करने में सफलता मिली है। कई देशों के मुकाबले प्रदेश में बेहतर कार्य हुआ है। उन्होंने एसजीपीजीआई की तारीफ करते हुए कहा कि इलाज की गुणवत्ता बनाए रखनी होगी।
इमरजेंसी मेडिसिन में होगी सुपरस्पेशियलिटी की पढ़ाई
संस्थान के निदेशक प्रो. आरके धीमान ने बताया कि इमरजेंसी मेडिसिन और आप्थलमोलॉजी में सुपर स्पेशियलिटी कोर्स ( डीएम) शुरू होगा। इसी तरह रेडियो फार्मेसी में एमएससी कोर्स शुरू होगा। इसके अलावा टेली आईसीयू से प्रदेश के छह मेडिकल कॉलेजों को जोड़ा जा रहा है।
उत्कृष्ट शोध करने वाले सम्मानित
स्थापना दिवस समारोह में उत्कृष्ट शोध करने वाले संकाय सदस्यों एवं छात्रों को सम्मानित किया गया। इस दौरान बेहतर कार्य करने वाले कर्मचारियों एवं अंगदान जागरूकता पोस्टर प्रतियोगिता के विजेता छात्रों को भी सम्मानित किया गया। संकाय सदस्यों में माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. उज्जवला घोषाल, गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी विभाग के डॉ. गौरव पांडेय, पीडियाट्रिक गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी विभाग के डॉ. मोइनक सेन शर्मा, नियोनेटल विभाग के डॉ. आकाश पंडित, इंडोक्राइन सर्जरी विभाग के डॉ. अमित अग्रवाल, न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉ. अरुण कुमार श्रीवास्तव, डॉ. कुंतल कांती दास व डॉ. वेद प्रकाश मौर्य, डॉ. स्वास्ती तिवारी, डॉ. खलीर्कुर रहमान, डॉ. प्रभाकर मिश्रा, डॉ. रोहित सिन्हा शामिल हैं। छात्र कैटेगरी में सम्मानित होने वालों में डॉ. अंकित गुप्ता, डॉ. भरत सिंह, डॉ. सौम्या श्रीवास्तव, डॉ. राजन शर्मा, डॉ. तृप्ति, डॉ. सुष्मिता राय शामिल हैं। इसी तरह सांत्वना पुरस्कार डॉ. आंचल दत्ता, डॉ. वंशीधर, डॉ. चतुर्मय अर्जुन और मेधा श्रीवास्तव शामिल हैं। बेस्ट सीनियर व जूनियर रेजीडेंट में डॉ. जय कुमार मेय्याप्पन, डॉ. वंदन रायानी, डॉ. वसुंधरा सिंह को सम्मानित किया गया। बेस्ट नर्स में रचना मिश्रा व ज्योति कुमारी एवं बेस्ट टेक्नीशियन में एनेस्थीसिया विभाग के टेक्नोलॉजिस्ट धीरज सिंह एवं सुनील तिवारी सम्मानित हुए।