योगी सरकार की ओर से प्रदेश में फूड फॉरेस्ट के जरिए हरियाली बढ़ाकर पर्यावरण संरक्षण की अभिनव पहल शुरू की जा रही है। इसके लिए सरकार ने अलग कृषि जलवायु क्षेत्रों (एग्रो क्लाइमेटिक जोन) के 15 जिलों को चिह्नित किया है। इन जिलों में किसानों के सहयोग से अगले छह महीने में फूड फॉरेस्ट विकसित किए जाएंगे। इसके लिए जो जिले चिह्नित किए गए हैं उनमें बिजनौर, अमरोहा और सहारनपुर आम तथा संभल, रामपुर व बदायूं अमरूद पट्टी के हैं। अन्य जिले भी किसी न किसी फलपट्टी में शामिल हैं।
दरअसल, सरकार का मकसद औद्यानिक फसलों के समन्वित विकास एवं प्रसंस्करण में यूपी को अग्रणी राज्य के रूप में विकसित करना है। फूड फॉरेस्ट एक साथ इन सभी उद्देश्यों को पूरा करने में मददगार होंगे। फिलहाल देश में फलदार पौधों का रकबा और उत्पादन क्रमश: 66.64 लाख हेक्टेयर एवं 990.69 लाख मीट्रिक टन है। इसमें यूपी की हिस्सेदारी क्रमश: 4.96 लाख हेक्टेयर एवं 110.6 लाख मीट्रिक टन है। देश के कु ल रकबे और उत्पादन में यूपी का योगदान क्रमश: 7.44 और 11.16 फीसदी है।
आम, अमरूद, आंवला के उत्पादन में यूपी देश में पहले नंबर पर है। उत्पादकता के लिहाज से आम की उत्पादकता में यूपी नंबर वन है जबकि अमरूद व आंवला की उत्पादकता में क्रमश: आंध्र प्रदेश एवं तमिलनाडु पहले नंबर पर हैं। उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रस्तावित फूड फॉरेस्ट प्रदेश में औद्यानिक उत्पादन और रकबा बढ़ाने में मददगार होंगे।
औद्यानिक फसलों के जरिए किसानों की आय बढ़ाने व प्रसंस्करण इकाइयों को कच्चा माल उपलब्ध कराने में भी मदद मिलेगी। इससें स्थानीय स्तर पर अतिरिक्त रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का सरकार का मकसद भी पूरा होगा।
इन जिलों में विकसित होंगे फूड फॉरेस्ट
बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, संभल, रामपुर, बरेली, बदायूं, गोरखपुर, शाहजहांपुर, पीलीभीत, गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद, मेरठ, सहारनपुर और बुलंदशहर।