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Lucknow News: भैंसों की रिहाई के लिए किसान सड़क पर डटे

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प्रदर्शन करते किसान।
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लखनऊ। भैंसों को बिना जुर्माना छोड़े जाने और मृत गोवंश की जांच की मांग पर किसानों ने सोमवार को एक बार फिर नगर निगम मुख्यालय के सामने धरना-प्रदर्शन किया, मगर प्रशासन उनकी मांगों को मानने से इन्कार कर दिया और साफ कहा कि भैंसों को जुर्माना वसूलने के बाद ही छोड़ा जाएगा। धरना शाम तक चला, जिसकी वजह से नगर निगम का कामकाज भी प्रभावित हुआ। गृहकर वसूली रोजाना के मुकाबले आधी रह गई।
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पिछले शुक्रवार को क्षेत्रीय पार्षद की शिकायत पर दुबग्गा इलाके में नगर निगम ने अवैध डेयरियों के खिलाफ अभियान चलाया था। इस कार्रवाई का भारी विरोध हुआ था। एक पशुपालक तो नगर निगम की गाड़ी के आगे लेट गया था। इसी दौरान पांच भैंसों को निगम ने पकड़ लिया था। इसके विरोध में उसी दिन किसानों ने निगम मुख्यालय पर धरना दिया था, लेकिन भैंसें नहीं छोड़ी गई थीं। शनिवार को भी धरना प्रदर्शन हुआ था और अब सोमवार को फिर किसानों ने मोर्चा खोल दिया।







धरनास्थल पर ही खाना पकाया
धरने के दौरान किसान वहीं खाना पकाते रहे। वहीं खाया भी। दोपहर तीन बजे कैपिटल तिराहे तक मार्च किया और पुलिस को ज्ञापन सौंपने के बाद लौट आए। किसान नेता आलोक वर्मा ने बताया कि एसीपी, एलआईयू और नगर आयुक्त के बीच वार्ता में भैंस छोड़ने व मृत गोवंश की जांच पर सहमति बनी है, लेकिन जब तक भैंसें रिहा नहीं होतीं, तब तक क्रमिक अनशन जारी रहेगा।
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गृहकर वसूली पर असर

प्रदर्शन के चलते निगम मुख्यालय का मेन गेट बंद रहा और सिर्फ साइड का रास्ता खुला। नतीजतन, गृहकर काउंटर पर भीड़ आधी रह गई। इस कारण काउंटर पर अन्य दिनों के मुकाबले आधा ही गृहकर जमा हुआ। तीन दिन पहले करीब तीन लाख रुपये गृहकर जमा हुआ था, जबकि सोमवार को महज 1.74 लाख रुपये ही जमा हुआ।

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Iमहापौर और नगर आयुक्त की मौजूदगी में बैठक हुई। तय हुआ कि बिना जुर्माना लिए भैंसें नहीं छोड़ी जाएंगी, क्योंकि किसानों की मांग अनुचित है। अवैध डेयरी के खिलाफ कार्रवाई पार्षद की शिकायत पर हुई थी। किसान जिस बछड़े की मृत्यु का आरोप लगा रहे हैं, वह निराधार है।
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I- डॉ. अभिनव वर्मा, पशु कल्याण अधिकारी, नगर निगमI

प्रदर्शन करते किसान।

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प्रदर्शन करते किसान।

प्रदर्शन करते किसान।

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प्रदर्शन करते किसान।

प्रदर्शन करते किसान।

प्रदर्शन करते किसान।

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