आयुर्वेदिक और यूनानी दवाओं को लेकर भ्रांति है कि जितनी पुरानी होगी, उतना ही असर बढ़ेगा। आयुष मंत्रालय ने इस भ्रांति को तोड़ते हुए कंपनियों के लिए इन दवाओं पर एक्सपायरी डेट लिखने को अनिवार्य बनाने जा रहा है।
इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में रविवार को हर्बल दवाओं पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में आयुष मंत्रालय के संयुक्त सचिव जितेंद्र शर्मा ने यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि पारंपरिक चिकित्सा जैसे आयुर्वेद, यूनानी और सिद्धा की दवाओं पर कड़े नियम लागू कर इसे भरोसेमंद बनाने की जरूरत है। जितेंद्र शर्मा ने स्पष्ट किया कि केवल कुछ आयुर्वेदिक दवाओं में यह गुण है कि वे जितना पुरानी होंगी, उतनी ही असरदार होंगी।
वैज्ञानिक रूप से इसकी पुष्टि हो चुकी है कि यह बात सभी आयुर्वेदिक या यूनानी दवाओं पर लागू नहीं होती है। ऐसे में मंत्रालय इन दवाओं पर एक्सपायरी डेट प्रिंट किए जाने को अनिवार्य करने की तैयारी कर चुका है। इसका पालन नहीं करने पर कंपनियों पर सीधी कार्रवाई होगी।