प्रदेश के शॉपिंग मॉल में भी अब महंगी विदेशी शराब की बिक्री हो सकेगी। साथ ही शराब के पुराने स्टॉक के निस्तारण के लिए भी नियमावली बनाई गई है। वहीं, शराब बनाने में इस्तेमाल होने वाले अल्कोहल की वेस्टेज की मात्रा का निर्धारण भी पहले के मुकाबले कम कर दिया गया है।
यह निर्णय कैबिनेट बाई सर्कुलेशन किया गया है। उत्तर प्रदेश आबकारी विभाग की ओर से विदेशी मदिरा के प्रीमियम रिटेल वेंड्स के लाइसेंस की व्यवस्था की गई है। इसके तहत शॉपिंग मॉल में महंगी शराब की दुकान खोलने के लिए लाइसेंस दिए जाएंगे।
वहीं, वित्तीय वर्ष पूरा होने के बाद स्टॉक में रहने वाली शराब के निस्तारण के लिए भी नियमावली बनाई गई है। अभी तक इस तरह की कोई व्यवस्था नहीं थी। इसके अलावा पहले श्रेणी एक के तहत 1.5 प्रतिशत तक वेस्टेज निर्धारित था, उसे घटाकर 0.5 प्रतिशत कर दिया गया है।
वहीं श्रेणी दो में 2 प्रतिशत निर्धारित वेस्टेज को 1 प्रतिशत कर दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि यह निर्धारण काफी पुराना था। उसके बाद से कई नई तकनीक आ गई हैं, जिसके कारण वेस्टेज निर्धारण में परिवर्तन किया गया है। वेस्टेज की मात्रा अधिक होने पर जुर्माने का निर्धारण ड्यूटी फीस के आधार पर तय होगा।