लखनऊ। सरोजनीनगर स्थित उद्यमिता विकास संस्थान के सभागार में मंगलवार को एमएसएमई मंत्रालय की ओर से एक दिवसीय जोनल कॉन्फ्रेंस हुई। उद्देश्य था... उद्यमियों को ऐसे टिप्स दिए जाएं जो उनके उत्पादों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा लायक बना सकें। विशेषज्ञों ने उद्यमियों को उत्पाद की गुणवत्ता बढ़ाने और निर्यात बढ़ाने के गुर सिखाए। कॉन्फ्रेंस में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली के उद्यमी शामिल रहे।
मुख्य अतिथि और एमएसएमई विभाग, भारत सरकार के संयुक्त सचिव विपुल गोयल ने कहा कि एमएसएमई संवाद का मकसद उद्यमों की लागत कम कर उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाना है। अब तक देश के 75 स्थानों पर क्लस्टर लेवल कार्यशालाएं हो चुकी हैं, जिनमें 6700 से अधिक उद्यमी शामिल होकर सुझाव दे चुके हैं। इसके बाद 11 जोनल कॉन्फ्रेंस और अंत में नेशनल समिट भी प्रस्तावित है।
डायरेक्ट्रेट जनरल फॉरेन ट्रेड (डीजीएफटी) की निदेशक बिंदा मोहन देसाई ने निर्यात बढ़ाने के तरीकों और गुणवत्ता सुधार के मानकों की जानकारी दी। कानपुर लघु उद्योग निगम के एमडी राजकमल यादव ने कहा कि एमएसएमई में विविधता इतनी अधिक है कि एक समान नीति बनाना चुनौतीपूर्ण होता है। हर उद्यम की जरूरतें अलग हैं।
उद्यमिता विकास संस्थान के निदेशक पवन अग्रवाल ने बताया कि उद्योग विभाग जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाकर उद्यमों को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। कार्यक्रम में देशभर के क्लस्टर प्रमुखों और विभिन्न सेक्टरों से जुड़े 200 से अधिक उद्यमी शामिल हुए।
सरोजनीनगर स्थित उद्यमिता विकास संस्थान के सभागार में मंगलवार को एमएसएमई मंत्रालय की ओर से एक दि
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