सरकार को इस बात की चिंता ही नहीं है कि कर्मचारियों के बच्चे मध्य सत्र में कहां और कैसे दाखिला लेंगे। उनका परिवार कहां रहेगा? मुख्यमंत्री को बताना चाहिए कि कर्मचारी परिवार का मुखिया होने के नाते उनका कोई दायित्व बनता है या नहीं ? कर्मचारियों को कार्यालय पहुंचने में थोड़े से भी विलंब पर कठोर कार्रवाई की जा रही है, लेकिन देर तक रोककर काम कराने वाले अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
हस्तक्षेप करें मुख्यमंत्री
मिश्र ने दावा किया कि न्यूनतम वेतन देने की नियमावली संभवत: तैयार हो चुकी है। पर, उसे मंत्रिपरिषद में ले जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है। कर्मचारी और शिक्षक कब तक उत्पीड़न बर्दाश्त करते रहेंगे।
मुख्यमंत्री से आग्रह है कि हस्तक्षेप कर न्याय दिलाएं वरना आरपार की लड़ाई को बाध्य होना पड़ेगा। वेतन समिति की रिपोर्ट दो वर्ष से लागू नहीं की गई। स्थानीय निकायों एवं निगमों को सातवें वेतन आयोग का पूरा लाभ नहीं दिया गया। पर, सरकार पूरी तरह चुप्पी साधे है।