एनआरएचएम घोटाले के प्रमुख आरोपी पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा व उनके
करीबियों की आय से अधिक संपत्ति की तलाश में जुटी ईडी को आईएएस अधिकारी के
खिलाफ कुछ साक्ष्य हाथ लगे हैं।
इसके आधार पर ईडी कुछ चुनिंदा एनजीओ और अधिकारी के खातों में लेन-देन के साक्ष्य तलाशने में जुट गई है।
ईडी को यह जानकारी पहले ही मिल चुकी है कि कुछ एनजीओ को नियमों के विपरीत लाभ पहुंचाया गया है। इन्हें एनआरएचएम से संबंधित काम भी दिए गए।
इसमें मानकों व नियमों की अनदेखी तो हुई ही, संबंधित कार्य के लिए होने वाले भुगतान में जमकर अनियमितता की गई। एनआरएचएम घोटाले की जांच में सीबीआई के सामने भी ये तथ्य आ चुके हैं।
पड़ताल में ईडी को इस बात के सबूत मिले थे कि कई एनजीओ के जरिये पूर्व मंत्री के कई सौ करोड़ रुपये खपाए गए।
एनजीओ के खातों से भी यह सामने आया कि चार सौ करोड़ रुपयों से अधिक की मनी लॉन्ड्रिंग की गई। ईडी ने इसमें फंस रही एनजीओ के खिलाफ विधिक कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है।
सूत्र बताते हैं कि एनजीओ के संचालक व संचालिका तत्कालीन प्रमुख सचिव के नजदीकी थे।
इसी अधिकारी ने एनजीओ संचालकों को पूर्व मंत्री व अन्य से मिलवाया और पूर्व मंत्री की काली कमाई को सफेद बनाने के लिए तैयार किया।
घोटाले में इस अधिकारी की भूमिका सामने आने पर ईडी ने उसकी चल व अचल संपत्ति की भी तलाश शुरू कर दी थी।
ईडी को पिछले दिनों इस अधिकारी द्वारा अपने खाते से एनजीओ संचालिका के नाम से जारी लगभग दस लाख के चेक के भुगतान की जानकारी मिली थी।
अब इस संचालिका की तलाश कर उससे भुगतान के बारे में पूछा जाएगा। ईडी यह भी जानना चाहती है कि प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी को अपने खाते से रकम देने की जरूरत क्यों पड़ गई।