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खत्म होगा ऑपरेशन व गोली का झंझट

Tue, 11 Nov 2014 11:16 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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त्वचा पर एक गर्भ निरोधक पैच और एक सप्ताह तक गर्भ न ठहरने की गारंटी। फैलोपियन ट्यूब में एक जेल डाला और अनचाहे गर्भ से बचने के लिए न तो कॉपर-टी, न ही रोज गोली खाने की बाध्यता।
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तीन महीने गर्भ न ठहरने की गारंटी। परिवार नियोजन के लिए ऐसे ही कई नए तरीके जल्द ही बाजार में उपलब्ध होंगे। इनका ट्रायल चल रहा है।

इससे नसबंदी जैसे स्थायी गर्भ निरोधक साधनों से बचा जा सकेगा। नेशनल एसोसिएशन ऑफ रिप्रोडक्टिव एंड चाइल्ड हेल्थ (नार्ची फेस्ट-2014) की कांफ्रेंस में रविवार को ये जानकारी डॉ. मंजू शुक्ला ने दी।

साइंस कन्वेंशन सेंटर में आयोजित कांफ्रेंस के अंतिम दिन आयोजन सचिव डॉ. मंजू शुक्ला ने बताया कि परिवार नियोजन के लिए कॉपर-टी, निरोध, गर्भनिरोधक गोली, नसबंदी, डिम्पा इंजेक्शन आदि संसाधनों का प्रयोग किया जा रहा है।
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इसके अलावा एक ऐसे जेल का ट्रायल चल रहा है जिसे फैलोपियन ट्यूब में डाल दिया जाएगा। इस जेल के प्रभाव से गर्भ नहीं ठहरेगा।

जब गर्भधारण करने की योजना दंपती बना लेंगे तो जेल को एक रसायन डालकर हटा दिया जाएगा। इसके अलावा एक ‘जेट’ भी जल्द ही भारत में उपलब्ध होगा।

इस जेट का प्रयोग स्वयं महिलाएं कर सकेंगी। ये तीन माह तक गर्भ निरोधक के रूप में प्रभावी रहेगा। अमेरिका में इसका इस्तेमाल किया जा रहा है।

एक पैच एक सप्ताह के लिए होगा कारगर

वहां ये एक डॉलर में उपलब्ध है। केजीएमयू की डॉ. उर्मिला सिंह ने बताया कि परिवार नियोजन में अब एक नई तकनीक गर्भनिरोधक पैच भी आ गई है।

इसे पेट के निचले हिस्से, हाथ या पीठ पर कहीं भी चिपका कर गर्भनिरोधक की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि स्किन पैच में हार्मोन होते हैं जो कि त्वचा के रास्ते शरीर में पहुंचता रहता है।

एक पैच एक सप्ताह के लिए कारगर होता है। हर सप्ताह इसे बदलवाने के लिए चिकित्सक के पास जाना पड़ता है।

परिवार नियोजन की नई तकनीकों के बारे में जानकारी देते हुए डॉ. उर्मिला सिंह ने बताया कि हार्मोन पैच के अलावा हार्मोन युक्त मेडिकेटेड नोवा रिंग भी कारगर गर्भ निरोधक है।

इस रिंग को महिलाओं की वजाइना में लगा दिया जाता है। एक सप्ताह तक योनि में रहने के दौरान गर्भधारण की समस्या से मुक्ति मिल जाती है।

इसलिए पूरे माह परिवार नियोजन के लिए तीन रिंग का प्रयोग करना पड़ सकता है। इन उपायों के लिए दंपतियों को इसका खर्च स्वयं वहन करना पड़ता है।

प्रसव के 48 घंटे के अंदर कॉपर टी लगवाना सुरक्षित

प्रसव के 48 घंटे के अंदर कॉपर-टी लगाना सबसे सुरक्षित और दर्द रहित तरीका है। इससे प्रसूता को दोबारा अस्पताल आने की जरूरत नहीं पड़ती है और गर्भधारण का खतरा भी कम हो जाता है। नार्ची फेस्ट-2014 में ये जानकारी डॉ. प्रीति कुमार ने दी।

उन्होंने बताया कि प्रसव के दौरान ही कॉपर-टी लगाना अधिक बेहतर है, क्योंकि इस समय प्रसूता को दर्द व तकलीफ नहीं झेलनी पड़ती।

उन्होंने बताया कि प्रसव होने के कारण बच्चेदानी का मुंह खुला रहता है। इसलिए कॉपर-टी आसानी से लगाई जा सकती है। पहले प्रसव के छह हफ्ते बाद कॉपर-टी लगाई जाती थी।

अब प्रसव के तुरंत बाद या फिर 10 मिनट बाद प्रसूता की सहमति से कॉपर टी लगा दिया जाता है। या फिर 48 घंटे के अंदर भी इसे लगाया जा सकता है।

उन्होंने बताया कि इससे प्रसव के चार सप्ताह बाद गर्भ ठहरने की परेशानी से भी मुक्ति मिल जाती है। डॉ. प्रीति कुमार ने बताया कि 50 फीसदी महिलाएं प्रसव के बाद कॉपर-टी लगवाने के लिए तैयार हो जाती हैं।

बस उन्हें इसके लिए जागरूक करना होता है। बिल गेट्स फाउंडेशन की डॉ. ज्योति बाजपेई ने बताया कि प्रसव के तुरंत बाद गर्भ निरोधक साधन कॉपर-टी लगाना सबसे अच्छा और सुरक्षित तरीका होता है। भारत में ये अभी सिर्फ 1 से 2 फीसदी है। जबकि चीन में इसे 70 फीसदी अपनाया गया है।
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एक हजार में 50 शिशुओं की हो रही मौत

नेशनल नियोनेटल फोरम के विशेषज्ञ और गवर्नमेंट हॉस्पिटल दिल्ली से डॉ. सुशील श्रीवास्तव ने बताया कि हर सौ में से जन्म लेने वाले 10 शिशुओं को जन्म के तुरंत बाद जन्म लेने की शिकायत होती है।

इनमें से नौ को तुरंत मदद देकर बचाया जा सकता है। इसके लिए चिकित्सक से लेकर नर्स तक सभी को रिसेसिटेशन (सांस देने की प्रक्रिया) का प्रशिक्षण होना जरूरी है।

उन्होंने बताया कि बरेली में चिकित्सकों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। लखनऊ में 24 डॉक्टरों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ये सभी अपने-अपने जनपदों में प्रशिक्षण देने का कार्य करेंगे।
 
नियोनेटोलॉजी फोरम के डॉ. सुनील कुमार मेहंदीरत्ता ने बताया कि स्टेट हेल्थ सर्वे-2012 के अनुसार यूपी में प्रति हजार पैदा होने वाले शिशुओं में 50 की मौत हो रही है। शहरों में ये आंकड़ा 36 प्रति हजार प्रति वर्ष है। जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 53 प्रति हजार प्रति वर्ष है।
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