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Lucknow News: गैस नहीं मिलने से बढ़ गई लागत, मजबूरी में खाने के बढ़ाए दाम

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गैस संकट।
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लखनऊ। व्यावसायिक सिलिंडर न मिलने से छोटे रोजगार वाले भट्ठियों का सहारा ले रहे हैं लेकिन हालात फिर भी नहीं संभले हैं। कारण यह कि लकड़ी व कोयले की कीमत ने लागत बढ़ा दी है। ऐसे में पूड़ी सब्जी से लेकर भोजन की थाली तक महंगी हो गई है। अस्पतालों के बाहर सस्ती कीमत वाली चाय भी दोगुने दाम की हो गई है। वहीं, कुछ संचालक घाटा सहकर भी दुकान चलाने के लिए मजबूर हैं। उनका कहना है कि अगर दाम बढ़ाते हैं तो ग्राहक टूटेगा। वहीं, कारोबार बंद रखने से कारीगर बेरोजगार होंगे। कारीगर व संचालक दोनों का घर चलता रहे इसीलिए नुकसान में भी होटल चला रहे हैं। उधर, लागत बढ़ने से रेट बढ़ाने वाले छोटे दुकानदारों ने बताया कि दाम बढ़ाने से 40 प्रतिशत तक ग्राहक कम हुए हैं।
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पूड़ी सब्जी की प्लेट 10 रुपये महंगी
राणा प्रताप मार्ग स्थित पूड़ी सब्जी के दुकानदार ने 10 रुपये प्रति प्लेट तक दाम बढ़ा दिए हैं। दबी जुबान में बताया कि किसी तरह दोगुने दामों में सिलिंडर मिल पा रहा है। इससे रेट बढ़ाए गए हैं। पूड़ी की प्लेट पर 5 रुपये, भटूरे की प्लेट में 10 रुपये और चावल के दाम में 10 रुपये प्रति प्लेट तक दाम बढ़ाए हैं।
10 की जगह 20 की हो गई सामान्य चाय
सिविल अस्पताल के सामने चाय की दुकान चलाने वाले फहीम ने बताया कि गैस न मिलने से भट्ठी जलानी पड़ रही है। इससे लागत बढ़ रही है। जो चाय पहले 10 रुपये की बेचते थे, वह अब 20 की बेचनी पड़ रही है।
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दाम बढ़ाए तो ग्राहक न मिलने का डर
कैसरबाग में चाय की दुकान चलाने वाले नवीन बताते हैं कि गैस न मिलने से इंडक्शन का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। हम लोगों को काफी समस्या हो रही है, लेकिन दाम नहीं बढ़ाया है, क्योंकि इससे ग्राहक कटने का डर है।
छात्रों के लिए राहत, नए लोगों के लिए 20 रुपये ज्यादा
नरही में टीफिन सर्विस चलाने वाले प्रकाश चौधरी ने बताया कि व्यावसायिक सिलिंडर न मिलने से भट्ठी पर खाना बनाना पड़ रहा है। लकड़ी का जुगाड़ भी मुश्किल हो रहा है। जो खाना आधे घंटे में बनता था, वह अब एक से डेढ़ घंटे में बन रहा है। इससे डिलीवरी देने में भी देर हो रही है। बताया कि जो पुराने छात्र हमसे जुड़े हैं, उन्हें पुराने दाम पर ही टिफिन दे रहे हैं। नए ग्राहकों के लिए 20 रुपये दाम बढ़ाया है।
तवा नहीं तंदूर की रोटी मिलेगी
चारबाग में भोजनालय चलाने वाले विजय ने बताया कि एक हफ्ते से सिलिंडर नहीं मिला है। कोयले की भट्ठी से खाना बन रहा है। कोयला महंगा होने से हमारा ज्यादा पैसा खर्च हो रहा है। होटल तो खोल रखा है, लेकिन दुकानदारी में बड़ा असर आया है। ग्राहक तवे की रोटी मांगता है, मगर गैस न होने से तंदूरी रोटी देते हैं। कई लोग इसे नहीं पसंद करते और वापस चले जाते हैं।
इंडक्शन ने बढ़ाया बिजली का खर्च
चारबाग के ही एक ढाबे के संचालक सुरेंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि कोयले की अंगीठी और इंडक्शन पर खाना बन रहा है, मगर इससे लागत बढ़ गई है। कोयला महंगा ही है। इंडक्शन से बिजली का खर्च बढ़ गया है। मजबूरी है इसलिए ढाबा चला रहे हैं। अगर बंद कर देंगे तो ग्राहक भी टूटेगा और हमारे साथ जुड़े कारीगर भी बेरोजगार हो जाएंगे।
वेटर घर चले गए, हर दिन 7000 का नुकसान
चारबाग के ही होटल के कारीगर दिनेश कुमार बताते हैं कि 10 दिन से गैस नहीं मिल रही। अंगीठी पर खाना बन रहा है। 100 से 180 रुपये की थाल है, लेकिन मटर पनीर, शाही पनीर व तवे वाली रोटी नहीं दे पा रहे हैं। सिर्फ 100 वाली थाली ही बेच पा रहे हैं। इससे लागत भी नहीं निकल रही है। ज्यादा काम नहीं होने की वजह से वेटर भी घर चले गए हैं। हर दिन 7000 रुपये का नुकसान हो रहा है।

गैस संकट।

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