12 साल के संदीप को किसी वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण के कारण तिल्ली (स्प्लीन) बढ़ गई थी। इसकी वजह से उसके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम हो गई थी। गरीबी के कारण बीते 10 साल से परिवारवाले उसका इलाज नहीं करा पाए। इसके चलते तिल्ली का आकार इतना बढ़ गया कि उसे पेट के अंदर के अन्य अंग दबने लगे।
केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर के पूर्व ईएमओ डॉ. शोभनाथ सोनकर बच्चे से छुटकारा दिलाने के लिए उसकी निजी संसाधनों से सर्जरी की और तकलीफों से निजात दिला दी। अब संदीप धीरे-धीरे स्वास्थ्य लाभ ले रहा है।
सर्जन डॉ. शोभनाथ सोनकर ने बताया कि हरिशंकर मौर्या आजमगढ़ में राजगीर का कार्य करते हैं। संदीप की दिक्कतों के बावजूद वो इतने सक्षम नहीं थे कि उसका सही इलाज करा पाते। उसकी दिक्कतों की जानकारी डॉ. शोभनाथ को मिली तो उन्होंने संदीप को बुलाकर उसकी जांच की और पाया कि बाएं हिस्से में पाया जाने वाला स्प्लीन का आकार बहुत बढ़ चुका है। ये शिकायत मरीज को मलेरिया, किसी भी वायरस या बैक्टीरिया के गंभीर संक्रमण के कारण होती है। इसमें स्प्लीन में खून भरता जाता है। जिससे उसका आकार बहुत बढ़ जाता है। संदीप को भी यही दिक्कत थी।
स्प्लीन बढ़कर उसकी नाभि के नीचे तक पहुंच गया था। इससे पेट के अंदर के अन्य अंग दबने लगे थे। स्प्लीन ने शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने का अपना कार्य भी बंद कर दिया था। सफेद रक्त कणिकाएं बनना बंद होने के कारण संदीप को कई और बीमारियां होने की आशंका हो गई थी। उसका हीमोग्लोबिन घटकर मात्र 5.6 रह गया था। उसे अधिक दिक्कत न हो इसलिए स्प्लीन को सर्जरी से बाहर निकालने का निर्णय लिया गया।