चिकित्सा संस्थानों से डीएम और एमसीएच की डिग्री लेने के बाद बॉन्ड के तहत होने वाली नियुक्ति का मामला गहराता जा रहा है। चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुरेश खन्ना से बातचीत के बाद भी शुक्रवार देर शाम एसजीपीजीआई के डॉक्टरों ने कैंडल मार्च निकाल विरोध जताया। मांगें न माने जाने पर सुपर स्पेशलिस्ट डिग्रीधारी डॉक्टर शनिवार को चिकित्सा शिक्षा महानिदेशालय और एसजीपीजीआई महानिदेशक कार्यालय पर अनशन शुरू करेंगे। इस मामले को लेकर लोहिया संस्थान, केजीएमयू सहित अन्य मेडिकल कॉलेजों के सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों ने भी आंदोलन का एलान कर दिया है।
डीएम और एमसीएच की डिग्री लेने के बाद बॉन्ड के तहत इन सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों को दो साल सेवा देनी है। इनकी मांग है कि इसके लिए सेंट्रल काउंसिलिंग कराई जाए। जिन संस्थानों में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद रिक्त हैं, वहां उन्हें दो साल के लिए समायोजित कर लिया जाए। इस मामले को लेकर एसजीपीजीआई के रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने शुक्रवार को चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुरेश खन्ना से मुलाकात की। मंत्री ने डीजीएमई महानिदेशालय को निर्देश दिया कि काउंसिलिंग कराई जाए। ऐसे में डीजीएमई की ओर से शनिवार को काउंसिलिंग का नोटिस जारी कर दिया गया। यह नोटिस देख सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों में आक्रोश बढ़ गया है। उनका कहना है कि 24 घंटे के अंदर काउंसिलिंग कराया जाना जानबूझकर मामले में नया विवाद खड़ा करना है।
एसजीपीजीआई और लोहिया संस्थान सहित विभिन्न चिकित्सा संस्थानों के सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों ने इस संबंध में चिकित्सा शिक्षा मंत्री, प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा और डीजीएमई को पत्र भेजा है। इसमें बताया है कि कई डिग्रीधारी व्यक्तिगत कारणों से लखनऊ से बाहर हैं। वे इतनी जल्दी काउंसिलिंग में उपस्थित नहीं हो पाएंगे। ऐसी स्थिति में पहले संस्थानों में खाली पदों को जारी किया जाए, इसके बाद काउंसिलिंग कराई जाए।
कैंडल मार्च निकाल शुरू किया आंदोलन
एसजीपीजीआई के डीएम, एमसीएच डिग्री धारी डॉक्टरों ने शुक्रवार देर शाम कैंडल मार्च निकाल आंदोलन का बिगुल बजा दिया है। इन डॉक्टरों ने महानिदेशक कार्यालय से कैंडल मार्च निकाल पूरे परिसर का भ्रमण किया। उन्होंने आरोप लगाया कि एसजीपीजीआई प्रशासन और चिकित्सा शिक्षा विभाग जानबूझकर राज्य सरकार की छवि को धूमिल करने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक तरफ प्रदेश में सर्वाधिक मेडिकल कॉलेज खोलकर रिकॉर्ड बनाने का एलान कर रहे हैं तो दूसरी तरफ चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारी सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों के साथ दुर्व्यवहार तक करने में पीछे नहीं हैं।
पद खाली होने के बाद भी मनमानी
एसजीपीजीआई के रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. आकाश माथुर एवं महामंत्री डॉ. अनिल गंगवार ने बताया कि केजीएमयू सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों को खाली पदों के सापेक्ष रखने की बात पर सहमत है, लेकिन एसजीपीजीआई सहित दूसरे संस्थान इससे इंकार कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मनचाहे लोगों को नियुक्त करने के चक्कर में सुपरस्पेशियलिटी की डिग्री लेने वालों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि नियमों की अनदेखी करने पर अदालत का दरवाजा भी खटखटाएंगे
बॉन्ड की सेवा शर्तों के तहत नियुक्ति संबंधी कार्यवाही की जा रही है। सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों ने काउंसिलिंग की मांग की है, उसे भी पूरा किया जा रहा है। शासन के निर्देश के मुताबिक आगे की कार्यवाही की जाएगी।
- आरके सिंह, अपर निदेशक चिकित्सा शिक्षा महानिदेशालय