केजीएमयू में डॉक्टरों और दवा कंपनियों का गठजोड़ तोड़ने की पूरी तैयारी हो चुकी है। ओपीडी के लिए अब विशिष्ट सॉफ्टवेयर बनाया गया है। इस पर सभी विभागों में लिखी जाने वाली अधिकतम दवाएं दर्ज होंगी। डॉक्टरों को यही जेनेरिक दवाएं लिखने का ही अधिकार होगा।
कुलपति ले. जनरल डॉ. बिपिन पूरी ने बताया कि शिकायतें आती हैं कि कुछ डॉक्टर मनमाने ब्रांड की दवाएं लिखते हैं। इस पर रोक लगाने के लिए नई व्यवस्था लागू की जा रही है। इसमें ओपीडी में डेस्कटॉप और प्रिंटर दिए जाएंगे। ओपीडी में मरीजों को देखने के बाद डॉक्टर सॉफ्टवेयर पर ही दवाएं आवंटित कर देंगे। जेनेरिक होने से ये दवाएं सस्ती मिलेंगी।
एचआरएफ के स्टोर पर ही सभी दवाएं
केजीएमयू में तीन साल पहले शुरू हुई व्यवस्था के तहत हॉस्पिटल रिवॉल्विंग फंड (एचआरएफ) में दवाएं मिलने लगी हैं। ये बाजार कीमत से कम पर हैं। इनके लिए अतिरिक्त स्थान भी उपलब्ध कराया है।
निगरानी करने में होगी आसानी
केजीएमयू में हर मरीज को यूनीक आईडी जारी कर पंजीकरण किया जाता है। इस पर ही जांच के लिए मरीज के सैंपल चढ़ाए जाते हैं। अब इस आईडी का इस्तेमाल दवाएं आवंटित करने में होगा। इससे मरीज का पूरा ब्यौरा एक साथ उपलब्ध होगा। एक क्लिक पर उसे दी जाने वाली दवाओं, उनमें बदलाव आदि का भी पूरा रिकॉर्ड रहेगा। मरीज की डिटेल के साथ ही विभिन्न शोध में भी इसका उपयोग होगा।
केजीएमयू की ओपीडी में जेनेरिक दवाओं पर जोर दिया जा रहा है। इसके तहत सॉफ्टवेयर आधारित व्यवस्था शुरू होगी। इससे मरीजों को एचआरएफ में मौजूद जेनेरिक दवाएं सस्ती कीमत पर मिल सकेंगी।
ले. जनरल डॉ. बिपिन पुरी, कुलपति, केजीएमयू