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पैरों में सूजन हो और बार-बार पेशाब आए तो कराएं किडनी की जांच, विशेषज्ञ ने दिए ये सुझाव

Wed, 05 Aug 2020 03:56 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala
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पैरों में सूजन हो, बार-बार पेशाब लगे, कमजोरी महसूस हो और सांस फूले तो किडनी की जांच करा लेनी चाहिए। यह लक्षण किडनी से जुड़ी बीमारियों की ओर इशारा करते हैं। समय से इलाज शुरू हो जाए तो दवाओं से बीमारी ठीक हो जाती है। यह कहना है आईएमए के सदस्य और किडनी रोग विशेषज्ञ डॉ. मुफज्जल अहमद का। वह अमर उजाला मेडिकल हेल्पलाइन में लोगों के सवालों का जवाब दे रहे थे। 
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सवालः मुझे डायबिटीज है। पैरों में सूजन है। पेशाब बार-बार जाना पड़ता है। क्या करना चाहिए? - रेशमा चौक, राधेश्याम गोमतीनगर
जवाबः ये लक्षण किडनी से जुड़ी बीमारियों की ओर इशारा कर रहे हैं। नेफ्रोलॉजिस्ट से सलाह लें। सीरम क्रिटनिन और यूरिन टेस्ट से किडनी की स्थिति का पता चल जाएगा। एक्यूट किडनी इंजरी है तो दवाओं से ठीक हो जाती है, लेकिन क्रॉनिक किडनी डिजीज में रिकवरी नहीं हो पाती है।

सवालः किडनी की बीमारी से बचने के लिए क्या करें? -नाजिम अलीगंज, महेश वर्मा गोसाईंगंज
जवाबः शुगर के मरीज, ब्लड प्रेशर और लंबे समय तक दवाएं खाने वाले मरीजों में इस समस्या की आशंका रहती है। ये मरीज हर साल एक बार अपनी जांच करा लें। जो लोग नियमित तौर पर दवाएं ले रहे हैं, उन्हें हर छह माह में सीरम क्रिटिनिन जांच करा लेनी चाहिए। जब लक्षण दिखना शुरू होते हैं तब तक बीमारी बढ़ चुकी होती है।
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सवालः मेरी डायलिसिस हो रही है। डाक्टर ने ट्रांसप्लांट के लिए बोला है। क्या करें? -अंकित सिंह गोमतीनगर, गोविंद राठौर इंदिरानगर
जवाबः जिन मरीजों की किडनी ठीक से काम नहीं करती हैं, उन्हें ट्रांसप्लांट की सलाह दी जाती है। ऐसे में मरीजों को नियमित तौर पर डायलिसिस की जरूरत पड़ती है। जब नौबत ट्रांसप्लांट कराने की है तो जितनी जल्दी हो करा लेना चाहिए। लंबे समय तक डायलिसिस होने के बाद ट्रांसप्लांट कराने पर फायदा कम मिलता है। इसलिए डायलिसिस या ट्रांसप्लांट में चुनाव करना हो तो पहले ट्रांसप्लांट चुनना चाहिए।
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किडनी में खराबी का कैसे चलेगा पता

डॉ मुफज्जल अहमद - फोटो : amar ujala
सवालः क्या 50 साल से अधिक उम्र वालों को भी ट्रांसप्लांट कराना चाहिए? -रुकैया बानो बांसमंडी, राजीव तिवारी फैजुल्लागंज
जवाबः ट्रांसप्लांट के लिए मरीज चुनते वक्त संबंधित व्यक्ति की अन्य अंगों की स्थिति, परिवार और सोसायटी के लिए उनकी उपयोगिता व उम्र जैसी चीजों का मूल्यांकन किया जाता है। किसी के हार्ट, लिवर सहित शरीर के अन्य अंग स्वस्थ हैं और वे ट्रांसप्लांट के बाद शरीर को सपोर्ट करने की स्थिति में है तो 70 साल में भी ट्रांसप्लांट किया जा सकता है।

सवालः किडनी में खराबी का पता कैसे चलेगा? -निकिता मोहनलालगंज, नितिन गुप्ता दुबग्गा
जवाबः किडनी मरीजों में लक्षण देर से आते हैं। ऐसे में सीरम क्रिटिनिन टेस्ट और यूरिन टेस्ट हर साल कराना चाहिए। हाई रिस्क श्रेणी में आने वाले शुगर, बीपी या अन्य बीमारियों के मरीजों को हर छह माह में जांच करानी चाहिए। अब जीएएफआर टेस्ट से किडनी की स्थिति के बारे में स्पष्ट जानकारी मिल जाती है। 
 
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