मनु भाकर ने कहा कि मुझे ट्रेनिंग कैंप में लड़की होने की वजह से मना कर दिया गया। मैंने कई बार मिन्नत की लेकिन मुझे ट्रेनिंग कैंप में जगह नहीं दी गई।
मनु ने कहा कि खेल हो या कोई दूसरा करियर ऑप्शन, परिवार के लोगों को साथ देना होता है। परिवार साथ में खड़ा होता है तो चुनौती आसान हो जाती हैं।
मंदिर में रुकती थी मैं
एक दौर ऐसा था कि मैं जब दूसरे शहरों में जाती थी तो होटलों में रुकने के लिए पैसे नहीं होते थे। मैं मंदिर में चादर बिछाकर सोती थी। लेकिन एक संकल्प था जिसे प्राप्त करना है। मैंने रेल के जनरल क्लास से फ्लाइट के बिजनेस क्लास तक के सफर को देखा है।
मनु ने कहा कि ऐसा नहीं है कि अब परिवार की रोक-टोक बंद हो गई है। अभी भी मेरे सोने, उठने, खाने, पीने में रोक-टोक होती है। आज सुबह भी मुझे नाश्ते में क्या खाना है इसके बारे टोका गया। इसमें कोई बुराई भी नहीं है। इसमें परिवार का एक कंसर्न दिखता है।