केंद्र में भाजपा सरकार बनने के साथ ही धर्म नगरी अयोध्या के विकास का खाका नए सिरे से खींचने की कोशिश है। हरि की पैड़ी की तर्ज पर सरयू तट पर निर्मित राम की पैड़ी को पुनर्जीवन प्रदान कर देशी-विदेशी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनाने को सरयू बैराज योजना तैयार की गई।
एक वर्ष के कार्यकाल में योजना प्रदेश से लेकर केंद्र तक कागजों में ही दौड़ रही है। अभी तक धरातल पर नहीं उतर पाई है।
धार्मिक व सांस्कृतिक नगरी को प्राच्य विद्याओं के अध्ययन केंद्र के रूप में विकसित करने के वायदे पर भी पहल शुरू हुई, लेकिन यह भी अन्य योजनाओं की तर्ज पर फाइलों में ही है।
एक वर्ष पूर्व हुए लोकसभा चुनाव में चुने गए सांसद लल्लू सिंह ने धर्म नगरी को धार्मिक व सांस्कृतिक दृष्टि से विकास को लेकर कई वायदे किए।
राम की पैड़ी खो चुकी है अपना आकर्षण
धार्मिक व सांस्कृतिक क्षितिज पर अयोध्या को भारतीय प्राच्य विद्या केंद्र के रूप में विकसित कर श्रीराम संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना करनी है।
इस केंद्र में संस्कृत भाषा के साथ ही योग, आयुर्वेद, यूनानी चिकित्सा के शिक्षण, प्रशिक्षण व शोध कार्य भी शामिल होना बताया गया। सांसद की ओर से इसके पहल की गई, लेकिन योजनाएं अभी धरातल पर नहीं आईं हैं। सरयू तट पर निर्मित राम की पैड़ी अपना आकर्षण खो चुकी है। इसको पुनर्जीवन देने के लिए खाका खींचा गया।
सरयू नदी से जुड़ी राम की पैड़ी को दूसरे छोर तक सरयू से जोड़ने के लिए बैराज निर्माण की योजना तैयार की गई। योजना पर सांसद के प्रयासों से कार्य शुरू होना भी बताया जा रहा है।
कुछ महीने पहले इसके लिए शासन स्तर से सर्वे कराया गया, लेकिन अब तक इसकी तकनीकी रिपोर्ट के साथ निर्माण अभी शेष है। बताया जाता है कि इसके लिए प्रदेश व केंद्र के सम्यक सहयोग से ही यह मूर्तरूप दिया जा सकेगा, लेकिन अब तक यह भी धरातल पर नहीं उतर पाई है।