उत्तर प्रदेश में डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया सहित अन्य बीमारियों के नियंत्रण के लिए नई रणनीति बनाई गई है। इनके लिए कोविड की तर्ज पर टेस्ट, ट्रेस और ट्रीटमेंट अभियान चलाया जाएगा। इस संबंध में सभी मुख्य चिकित्साधिकारियों और मलेरिया अधिकारियों को निर्देश दिया गया है।
बरसात के दिनों में डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, स्क्रब टाइफस, लेप्टोस्पायरा सहित अन्य जलजनित और संक्रामक बीमारियां फैलती हैं। इनके अचानक फैलने से उन्हें नियंत्रित करने में समस्या आती है। ऐसे में इस बार बारिश से पहले ही पूरी सजगता बरती जा रही है। इन बीमारियों के नियंत्रण के लिए कोविड मॉडल को अपनाया जा रहा है। हर अस्पताल में फीवर क्लीनिक को सक्रिय कर दिया गया है। यहां बुखार के मरीजों की जांच अनिवार्य कर दी गई है।
जांच में डेंगू अथवा अन्य बीमारी की पुष्टि होती है तो संबंधित इलाके में अभियान चलाया जाएगा। टेस्ट, ट्रेट और ट्रीटमेंट मॉडल के जरिए पॉजिटिव मिले मरीज के घर के आसपास 50 परिवारों की स्क्रीनिंग की जाएगी। इसके अलावा अन्य परिवारों में बीमारी रोकने की जानकारी दी जाएगी। उनको साफ-सफाई और मच्छर रोधी अभियान के बारे में बताया जाएगा।
जिला व सीएचसी स्तर पर आरआरटी गठित
अपर निदेशक डॉ. रमेश चंद्र पांडेय ने बताया कि जिला और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर रैपिड रिस्पांस टीम (आरआरटी) का गठन किया गया है। 821 ब्लॉक में आरआरटी टीमें सक्रिय हैं। जहां पॉजिटिव मरीज मिल रहे हैं, वहां टीमें भेजी जा रही है।
पॉजिटिव मिलने वाले मरीज का फोन नंबर भी लिया जा रहा है ताकि उससे बातचीत कर टीम के पहुंचने के बारे में निगरानी की जा सके। इसके लिए मुख्यालय पर 15 टीम लगाई गई है और एक एप भी विकसित किया गया है। एप पर पॉजिटिव मिले मरीज के बारे में जानकारी रहती है। टीम संबंधित मरीज के घर के आसपास कांट्रैक्ट ट्रेसिंग का कार्य पूरा करेगी तो उसे भी एप पर सूचना देनी होती है।