लखनऊ। बिहार से बकरे के कारोबार की बातचीत कर वापस लखनऊ आ रहे चार युवकों की बाराबंकी में देर रात हुए हादसे में मौत हो गई। सभी हुसैनाबाद के सुरैया मंजिल के रहने वाले थे। हादसे में चारों युवकों आमिर रजा, हसन उर्फ टिंकू, शबी हैदर उर्फ शावेज और अनीस मियां की मौत की सूचना मोहल्ले में पहुंची तो चीख पुकार मच गई। परिवारीजनों केचीखपुकार सुनकर मोहल्ले के लोग पहुंच गये। देखते-देखते पूरा मोहल्ला चारों के घर पर पहुंच गया। सुबह परिवारीजन बाराबंकी के लिए निकले तो वहीं पूरे इलाके में मातम का सन्नाटा पसरा हुआ था। सभी एक दूसरे को डबडबाई आंखों से देख रहे थे। किसी के गले से कोई आवाज नहीं फूट रही थी।
बेटी से कहा गिफ्ट लेकर आउंगा, घर पहुंची मौत की सूचना
बाराबंकी हादसे में मृत आमिर रजा हुसैनाबाद सुरैया मंजिल में रहता था। वह बिहार जाने के लिए निकल रहा था तो उसकी दो साल की छोटी बेटी ततबीर ने वापसी में गिफ्ट लाने की बात कही थी। लेकिन बुधवार को गिफ्ट नहीं आमिर केमौत की सूचना पहुंची। मूलरूप से बिहार केभागलपुर के रहने वाले नासिर रजा 1989 में लखनऊ के हुसैनाबाद सुरैया मंजिल स्थित अपने ससुराल आ गये।
नासिर केमुताबिक, 1989 में भागलपुर में हुए दंगे में उनकेपरिवार के21 लोगों की मौत हो गई थी। उसमें पत्नी भी शामिल थी। परिवार के साथ यहां सुरक्षित रहने केलिए आये थे। नासिर केतीन बेटे हैं। इसमें अली रजा, अब्बास रजा और आमिर रजा। आमिर सबसे छोटा था। वहीं दोनों बडे़ बेटे अली और अब्बास कुछ साल पहले भागलपुर चले गये। वहीं पर रहकर प्रॉपर्टी का काम करने लगे। आमिर की एक बहन है। बुधवार तड़के जैसे ही बूढ़े नासिर को बेटे की मौत की सूचना मिली तो वह एकटक लोगों को देखते रहे। आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहा था। वहीं 33 साल पुराना पत्नी केमौत का जख्म फिर से हरा हो गया। आमिर की पत्नी इलियास के मुताबिक वह रात में कई बार कॉल किया लेकिन रिसीव नहीं हुआ। सुबह जब कॉल किया तो मोबाइल बंद आ रहा था। जैसे ही उसे हादसे की सूचना मिली तो वह गश खाकर गिर गई। आमिर की दो बेटियां 5 साल की शिजा फातिमा और दो साल की ततबीर फातिमा हैं।
टूट गई आर्थिक स्रोत की कड़ी
वहीं हादसे में आमिर के साथ उसका मौसेरा भाई हसन उर्फ टिंकू की भी मौत हो गई। पिता जियाउल की काफी उम्र हो चुकी है। वह कभी बिजली के अच्छे मिस्त्री हुआ करते थे। लेकिन समय ने उनके हुनर पर पाबंदी लगा दी। वहीं हसन ही पूरे घर का खर्च चलाता था। वह अपने बड़े होने का पूरा दायित्व निभा रहा था। दो छोटे भाइयाें शमीम, समीउल को पढ़ाने से लेकर उनके खर्च तक का जिम्मा हसन पर ही था। बिहार से चलते समय मंगलवार रात 10 बजे उसकी अपने पिता व भाइयों से बात हुई । हसन ने बताया कि वह बिहार से निकल चुका है। सुबह लखनऊ पहुंच जाएगा। लेकिन बेटा की जगह उसका शव दरवाजे पर पहुंचा।
सात महीने पहले खरीदी थी इनोवा
जिस इनोवा गाड़ी से बाराबंकी में हादसा हुआ। वह शबी हैदर उर्फ शावेज की थी। शावेज इकलौता बेटा था। उसने इनोवा 7 महीने पहले ही खरीदी थी। उसके परिवार वालों को पता ही नहीं था। वह बकरा व्यापार करने के लिए नहीं बल्कि अपनी मौत के लिए जा रहे हैं। परिवार में पत्नी अलीशा वह 8 माह का बेटा है। जिसके लीवर का इलाज चल रहा था । साबिर ने बकरों में रुपये ही इसीलिए लगाए थे कि जिससे कि वह बकरीद तक अच्छा पैसा कमाकर बच्चे का इलाज करवा सके।
उधार लेकर नया काम शुरू करने की सोची
हादसे में अनीस मियां की भी मौत हो गई। वह चाय का होटल चलाते थे। पूरे परिवार के खर्च का जिम्मा भी इन्ही पर था। परिवार में पत्नी इरफाना के अलावा दो बच्चे अबीहा और मोहम्मद हैं। पत्नी इरफाना को हादसे में पति की मौत का यकीन नहीं हो रहा है। इरफाना केमुताबिक चाय के होटल से काम नहीं चल पा रहा था। इसी कारण कुछ रुपये जुटाए और उधार केरुपये लेकर नया कारोबार शुरू करने की सोची थी। ताकि बच्चों की परवरिश सही से हो सके। लेकिन हादसे ने बच्चों को बेसहारा कर दिया।