गृहमंत्री अमित शाह के साथ दारा सिंह चौहान (फाइल फोटो)
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बसपा, भाजपा और सपा से होते हु अब दुबारा भाजपा में लौटने वाले दारा सिंह चौहान ही घोसी विधानसभा के लिए होने वाले उप चुनाव में भाजपा प्रत्याशी होंगे। भाजपा ने सोमवार को चौहान का नाम अधिकृत प्रत्याशी के रुप में जारी कर दिया है। मऊ की घोसी पर मजबूत पकड़ रखने वाले दारा सिंह के मैदान में आने से इस उपचुनाव में भाजपा और सपा के बीच रोचक मुकाबला के आसार हैं। सपा ने इस सीट से कई बार के विधायक रहे सुधाकर सिंह को उम्मीदवार बनाया है।
बता दें कि योगी-01 सरकार में दारा सिंह कैबिनेट मंत्री थे और उनके पास वन एवं पर्यावरण जैसा महत्वपूर्ण विभाग था। लेकिन 2022 में हुए विधानसभा चुनाव से ठीक पहले दारा सिंह चौहान ने स्वामी प्रसाद मौर्या और धर्म सिंह सैनी के साथ मंत्रिमंडल और भाजपा से इस्तीफा देकर सपा में चले गए थे। सपा का दामन थामने के बाग भी चौहान घोसी सीट जीतने में कामयाब रहे। जबकि स्वामी प्रसाद को हार का मुंह देखना पड़ा था।
हालांकि चुनाव जीतने के बाद भी चौहान का सपा में मन नहीं रमा। माना जा रहा है कि इसकी वजह चौहान को सपा में उतनी तरजीह न मिलना है, जितनी तरजीह चुनाव हारने के बाद स्वामी प्रसाद को मिली। स्वामी को पार्टी में राष्ट्रीय महासचिव जैसा पद के साथ एमएलसी भी बना दिया गया। इससे आहत होकर चौहान ने कुछ दिन पहले फिर पाला बदला। उन्होंने सपा और विधायकी से इस्तीफा देकर दुबारा भाजपा में शामिल हो गए। तभी से उन्हें प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाए जाने की चर्चा है। अब भाजपा ने उन्हें फिर से घोसी से उम्मीदवार बना दिया है। ऐसे में यह माना जा रहा है कि जल्द ही मंत्रिमंडल के विस्तार में चौहान का मंत्री बनना पक्का है।
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चौहान का ओबीसी में अच्छी पकड़
माना जाता है कि दारा सिंह चौहान की अपनी बिरादरी (नोनिया) के अलावा दलित वर्ग में भी अच्छी पकड़ है। इसलिए वह जिस भी दल से चुनाव लड़ते हैं, उनकी बिरादरी उनके साथ ही रहती है। 2022 के चुनाव में उन्होंने इसे साबित भी किया था। बेहतर जातिय समीकरण होने के बाद भी भाजपा को यहां हारना पड़ा था। घोसी विधानसभा क्षेत्र में सिर्फ नोनिया मतदाओं की संख्या 45 से 47 हजार और राजभर मतदाता भी 55 से 58 हजार हैं। इन जातियों पर चौहान की अच्छी पकड़ मानी जाती है।
भाजपा-सपा की प्रतिष्ठा दांव पर
माना जा रहा है कि घोसी विधानसभा का उप चुनाव में भाजपा और सपा की प्रतिष्ठा दावं पर है। पिछला चुनाव दारा सिंह ने सपा उम्मीदवार के तौर पर जीता था. इसलिए इस सीट पर कब्जा बरकरार रखना सपा के लिए चुनौती होगी। वहीं, दारा सिंह को अब इसी सीट से भाजपा उममीदवार के तौर पर जीत कर यह साबित करना होगा कि बार-बार पार्टी बदलने के बाद भी ओबीसी व व दलितों में उनका प्रभाव अब भी बरकरार है। चौहान इस बार इस सीट से दूसरी बार चुनाव लड़ रहे हैं।