सरयू तट के संत तुलसी दास घाट पर खड़ा जटायु क्रूज।
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सरयू तट पर क्रूज जटायु के पर फैलने से पहले ही कतर गए। पर्यटकों को रिझाने के लिए शुरू की गई यह सेवा हेलीकॉप्टर और पैराग्लाइडिंग की तरह कुछ ही दिनों में फेल हो गई। लोगों का कहना है कि तीनों सेवाएं जल्दबाजी में बिना किसी होमवर्क के शुरू की गई थीं। इसलिए उपयोगिता साबित नहीं कर सकीं।
रामनगरी को विश्वस्तरीय पर्यटन नगरी के रूप में विकसित करने की कवायद तेजी से चल रही है। 34 हजार करोड़ की योजनाओं से अयोध्या में सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। अप्रैल में पर्यटन विभाग की तरफ से ''''अयोध्या धाम के हवाई दर्शन'''' सेवा शुरू की गई थी। इसके लिए प्रति व्यक्ति तीन हजार रुपये का शुल्क तय किया गया था। आठ मिनट में पर्यटकों को पूरी अयोध्या के हवाई दर्शन कराए जाने थे। यह सेवा पहले 15 दिन के लिए ट्रायल के तौर पर शुरू की गई थी। जिस कंपनी को यह जिम्मेदारी दी गई थी, वह कंपनी 11 दिन में ही वापस लौट गई। बताया गया कि हवाई दर्शन सेवा उपलब्ध कराना कंपनी के लिए महंगा साबित हो रहा है।
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इसी तरह कुछ महीने पहले अयोध्या में पैराग्लाइडिंग की सेवा शुरू की गई। इसका उद्घाटन जिले के वरिष्ठ अधिकारियों ने किया था, लेकिन यह सेवा कब शुरू हुई और कब बंद हुई, किसी को पता ही नहीं चला। इसी तरह सितंबर में शुरू हुई क्रूज सेवा का भी हाल बेहाल है। इस संबंध में पर्यटन अधिकारी आरपी यादव ने कुछ भी बोलने से मना कर दिया।
पुरानी नाव को सजा कर बना दिया क्रूज
स्थानीय निवासी रितेश बताते हैं कि पुरानी नाव को सजा कर क्रूज बना दिया गया है। शुरुआती दिनों में ही क्रूज खराब हो गया था। इस पर घूमने के दौरान क्रूज जैसी सेवाएं देने की बात कही गई थी, लेकिन यह पर्यटकों को जरा भी आकर्षित नहीं कर पाया। सरयू घाट स्थित करतलिया आश्रम के महंत रामदास का कहना है कि ये सभी सेवाएं जल्दबाजी में शुरू की गईं। पहले अयोध्या का भौगोलिक अध्ययन करना होगा। यहां के माहौल को समझना होगा।
पर्यटन मंत्री ने किया था जटायु का लोकार्पण
आठ सितंबर को पर्यटन व संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने समारोह पूर्वक जटायु क्रूज सेवा का उद्घाटन किया था। उन्होंने कहा था कि क्रूज के संचालन से सड़कों पर लोड कम हो जाएगा। फिलहाल मात्र 53 दिन के भीतर ही यह सेवा बंद होने के कगार पर पहुंच गई है।