दिल्ली के कॉरपोरेट हॉस्पिटल में पांच साल के बच्चे की चार दफा सर्जरी हुई। चारों सर्जरी फेल हो गई। आखिर में परिजन बच्चे को लेकर केजीएमयू आए। यहां के डॉक्टरों ने बताया कि पांचवीं सर्जरी चुनौतीपूर्ण थी। कड़ी मशक्कत के बाद डॉक्टरों ने सफल ऑपरेशन कर बच्चे को जन्मजात बीमारी से निजात दिलाई।
रामपुर निवासी पांच साल का बच्चा लिंग की जन्मजात बीमारी हाइपोेस्पेडियस से ग्रस्त था। इसमें लिंग के निचले हिस्से से लगातार पेशाब टपकता रहता है। दिल्ली के अस्पताल में बच्चे का पहला ऑपरेशन 2018, दूसरा 2019, तीसरा 2020 और चौथा ऑपरेशन 2021 में हुआ था। इन चारों ऑपरेशनों और करीब 10 लाख रुपये के खर्च के बाद भी मरीज की बीमारी ठीक नहीं हुई। बीते तीन दिसंबर को पिता ने केजीएमयू बाल रोग की ओपीडी में डॉ. एसएन कुरील को दिखाया। डॉ. कुरील ने बताया सर्जरी काफी चुनौतीपूर्ण थी। पिछले चार ऑपरेशनों की वजह से लिंग विकृत हो गया था। पिछले ऑपरेशनों की वजह से टिशू की कमी थी। करीब पांच घंटे तक बच्चे की सर्जरी चली, जो सफल रही।
इन डॉक्टरों का रहा सहयोग
टीम में डॉ. एसएन कुरील, डॉ. अर्चिका गुप्ता, डॉ. गुरमीत सिंह, डॉ. सर्वेश कुमार गुप्ता,
डॉ. सतीश वर्मा, सिस्टम सुनीता शािमल थी।
क्या है हाइपोेस्पेडियस बीमारी
यह एक जन्मजात बीमारी है। इसमें लिंग की नोक पर छेद नहीं होता है और शिशु
लिंग के नीचे की सतह पर स्थित असामान्य छेद से पेशाब करता है। 250 शिशुओं के जन्म होने बाद किसी एक शिशु में यह समस्या देखने को मिलती है।