मुख्य लेखा परीक्षा अधिकारी सहकारी समितियां एवं पंचायतें उत्तर प्रदेश की ओर से विधानमंडल में पेश की गई वर्ष 2013-14 की रिपोर्ट में जिला पंचायत लखनऊ में कई अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक 13वें वित्त आयोग की जिस रकम को पेयजल, सीवेज, कूड़ा प्रबंधन, स्ट्रीट लाइट व अन्य नागरिक सुविधाओं के रखरखाव में खर्च होना था, उसके 4,65,44,354 रुपये सड़कों के सीसी कार्य लेपन व मरम्मत में खर्च कर दिए गए। इसे शासनादेश की व्यवस्था के विपरीत कार्य माना गया। साथ ही तत्कालीन अध्यक्ष विजय बहादुर यादव, अपर मुख्य अधिकारी अजय कुमार सिंह समेत सात लोगों से दुरुपयोग की गई रकम की ब्याज सहित वसूली व प्रशासनिक कार्यवाही की अपेक्षा जताई है। मामले में अन्य अधिकारियों में वित्तीय परामर्शदाता रवि शंकर मिश्र, अभियंता जमाल मिर्जा व अवर अभियंता सत्य प्रकाश दुबे, अशोक सिंह व केके भाष्कर को दोषी माना गया है।
रिपोर्ट में 2013-14 में ही अधिकारियों, कर्मचारियों के वेतन से काटी भविष्य निधि की 29 लाख 31 हजार 374 रुपये की रकम को अफसरों, कर्मियों के नाम से खुले बचत खातों में जमा करने को भी नियम विरुद्ध माना है। भविष्य निधि की रकम भारत सरकार की बचत योजनाओं में जमा होनी चाहिए। ऐसा न होने से अधिकारियों, कर्मचारियों को ब्याज का नुकसान हुआ। आयकर की धारा 80 सी में दी छूट भी अनियमित रही। इसके लिए भी अजय कुमार सिंह व रवि शंकर मिश्र को दोषी माना गया।
सड़क बनाने के लिए ठेकेदारों की ओर से खरीदी जलौनी लकड़ी के बिलों से 20 प्रतिशत नमी की कटौती न करना भी गलत माना है। अभियंता जमाल मिर्जा व अवर अभियंता सत्य प्रकाश दुबे, अशोक सिंह व केके भाष्कर से 35,509 रुपये की ब्याज सहित वसूली की अपेक्षा जताई है। इन अभियंताओं से अन्य गड़बड़ी पर भी ब्याज सहित वसूली की अपेक्षा है। वहीं, आपदा राहत कोष के लिए काटी 59891 रुपये की राशि को राहत कोष में जमा कराने का प्रमाण नहीं मिला है। इसके लिए लेखाकार बृजेश कुमार वर्मा से ब्याज सहित वसूली की अपेक्षा की गई है।
अन्य मामले में तत्कालीन अध्यक्ष के इस्तेमाल के लिए किराये के वाहन का 26,400 रुपये प्रतिमाह की दर से कुल 2,90,400 रुपये के चेक से मे. स्वाती शुक्ला को किए भुगतान को भी अनियमित माना गया है। रिपोर्ट के अनुसार अध्यक्ष को संस्था की गाड़ी पहले से मिली है व बिल आदि उन्होंने देखा नहीं है। यही नहीं बिल मूल न होकर कंप्यूटर जनरेटेड हैं। इस रकम की ब्याज सहित वसूली भी अजय कुमार सिंह व रवि शंकर मिश्र से करने की अपेक्षा की गई है। इसके अलावा कई और भुगतानों में भी अनियमितता मिली है।