गरीब परिवार की उर्मिला वर्मा 2018 में पुलिस विभाग में आरक्षी पद पर भर्ती हुई तो मानो उसके सपनो को पंख लग गए। वह नौकरी कर अपने माता-पिता सहित पूरे परिवार का भरण पोषण करती थी। एक माह पहले ही उर्मिला ने नई टीवीएस स्कूटी खरीदी और उसे चलाना सीख रही थी। 112 पीआरवी 0531 में तैनात थी। पीआरवी पर तैनात बलराम सिंह ने बताया कि रविवार रात दस बजे से आरक्षी उर्मिला की उसके साथ ही पीआरवी में ड्यूटी थी लेकिन वो नहीं पहुंची थी। टाइम पर पीआरवी वाहन में न आने पर उर्मिला के मोबाइल पर फोन किया लेकिन वो मिल नहीं रहा था। रात 11 बजे उर्मिला के आत्महत्या करने की खबर मिली तो सभी परेशान हो गए।
व्हाट्सएप पर दोस्त को मेसेज करने के बाद दी जान
आरोपी होमगार्ड जितेन्द्र कुमार शर्मा ने बताया कि रविवार रात नौ बजे के करीब उसके वाट्सएप मैसेंजर पर मेसेज करते हुए उर्मिला ने लिखा था कि तुमने इसके पहले तो मुझे आत्महत्या करने से रोक लिया था। अब चाहकर भी नहीं रोक पाओगे। मैं जान देने जा रही हूं। जीतेन्द्र ने बताया कि मेसेज देखते ही वो लखनऊ से अपनी ड्यूटी छोड़कर तुरंत उर्मिला को बचाने के लिए बाइक से मोहनलालगंज पहुंचा लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
आरोपी होमगार्ड जीतेन्द्र ने परिजनों के आरोपों को खारिज करते हुए बताया कि वह और उर्मिला अच्छे दोस्त थे। निगोहां में तैनाती के दौरान उसकी दोस्ती हुई थी। इसके बाद से वो जरूरत पर उर्मिला की मदद कर देता था। एक माह पहले उर्मिला ने जो स्कूटी खरीदी थी वो भी उसके ही नाम थी। जितेन्द्र ने बताया कि हर माह उसे जो वेतन मिलता था वो अपनी बीमार मां के इलाज समेत परिवार के भरण पोषण में लगाती थी। उसके बाद भी परिवारीजन संतुष्ट नहीं थे। इसके चलते वो डिप्रेशन में थी और तीन माह पहले ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या करने जा रही थी। पता चलने पर उसे आत्महत्या करने से रोकने के साथ समझाया था।