जमीन विवाद के चलते तीन साल पहले लापता किशोरी का पिता व उसका परिवार भी आसाराम का अनुयायी था और आश्रम के सत्संग में आना-जाना था। बेटी के लापता होने के बाद परिजन खोजबीन करते हुए इस आश्रम में भी आए थे। किशोरी की मां व भाई ने घटना के दूसरे दिन छह अप्रैल को यहां भी खोजबीन की, लेकिन उसका कहीं पता नहीं चल सका।
पुलिस की भूमिका पर उठ रहे सवाल
किशोरी के लापता होने की सूचना परिजनों ने पांच अप्रैल को ही नगर कोतवाली में दी थी, लेकिन पुलिस ने प्रार्थना पत्र को गंभीरता से ही नहीं लिया। सात अप्रैल की देर रात जब आश्रम के कर्मचारियों ने शव मिलने की सूचना दी तो पुलिस ने अपनी गर्दन बचाने के लिए दिन में ही अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कर कागजी कार्रवाई पूरी कर ली। परिजनों का कहना है कि यदि पुलिस पहले दिन से ही गंभीर होती तो उनकी बेटी की जान बच जाती। पीड़ित परिवार के घर एहतियातन पुलिस तैनात कर दी गई है।
कार किसकी यह पता लगाने में ही हांफ गई पुलिस
आसाराम के आश्रम में जिस ऑल्टो कार में किशोरी का शव बरामद हुआ उसका ही पता लगाने में पुलिस हांफ गई। बताया कि यह कार आश्रम के ही किसी साधक की है। जिसे राजेश नामक किसी अनुयायी ने आश्रम को दान दिया था। यह कार आश्रम में ही खड़ी रहती है। इसकी नंबर प्लेट भी टूटी हुई है। ऐसे में सवाल उठता है कि आश्रम परिसर में खड़ी कार से दुर्गंध आने पर ही यहां रह रहे लोगों को जानकारी हुई। पहचानने के बावजूद लोगों ने किसी का शव होने की सूचना पुलिस को दी।
मृतक किशोरी की मां की तहरीर पर करनैलगंज कोतवाली के महेवा परसौरा के जगदीश दूबे, नगर कोतवाली के रूद्रपुर विशेन के पप्पू तथा जानकीनगर के सुरेंद्र पांडेय के खिलाफ अपहरण का केस दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार आरोपियों में से एक सुरेंद्र से किशोरी के परिवार का जमीन का विवाद पहले से ही चल रहा है।
पांच टीमें गठित, चल रही जांच
एसपी संतोष कुमार मिश्र का कहना है कि प्रकरण की जांच के लिए पांच टीमें गठित की गई हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है। जल्द ही पूरे मामले का राजफाश किया जाएगा। हालांकि प्रकरण में नामजद मुकदमा दर्ज किया गया है, लेकिन जो भी जांच के दौरान दोषी मिलेंगे उन सभी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।