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प्रेमिका से मिलने के बहाने बुलाकर मौत के घाट उतरवाने वाली गिरफ्तार

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शातिराना अंदाज में ठेकेदार अभय सिंह को उसकी प्रेमिका से मिलने के बहाने बुलाकर मौत के घाट उतरवाने वाली नेहा श्रीवास्तव को आखिर हाईकोर्ट की सख्ती के बाद गिरफ्तार कर लिया गया।
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नेहा सवा साल से फरार चल रही थी। यही नहीं उसपर पांच हजार रुपये का इनाम घोषित था। भाड़े पर हत्या करने वाला नेहा का पति पहले से ही जेल में बंद है। पति के इशारे पर ही उसने अभय को बुलाया था।

एएसपी ट्रांसगोमती जय प्रकाश ने बताया कि एसओ विकासनगर रवि श्रीवास्तव की टीम ने शुक्रवार सुबह इंदिरानगर के क्रांतिनगर तकरोही में नेहा श्रीवास्तव को उसके घर से गिरफ्तार किया। उनका कहना है कि नेहा ने पति नित्यानंद श्रीवास्तव के इशारे पर अभय को उसकी प्रेमिका से मुलाकात के बहाने बुलाया था।
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इसके बाद नित्यानंद ने अपने साथी फारूख व आबकारी विभाग के अफसर महेंद्र सिंह के करीबी रिश्तेदार आबकारी के सिपाही ज्ञानेंद्र सिंह की मदद से मौत के घाट उतार दिया। अगले दिन उसका शव बाराबंकी के जैदपुर इलाके में लावारिस खड़ी उसकी कार में मिला था।

ये थी कहानी...प्रेम किया, पर मौत मिली

अभय सिंह का इंटर कॉलेज में पढ़ाई के दौरान छात्रा से प्रेम हुआ। दोनों ने 30 सितंबर 11 को आर्यसमाज मंदिर में शादी की और 20 अक्तूबर को शादी के रजिस्ट्रेशन के बाद परिवारीजनों को भनक लगी।

इस शादी से लड़की के परिवारीजन नाखुश थे। परिवारीजन बेटी को विदा कराकर लाए और घर में कैद कर दिया। अभय ने पत्नी की विदाई के लिए 5 नवंबर को पारिवारिक न्यायालय में मुकदमा कर दिया। इसके बाद दोनों परिवारों में तनातनी शुरू हुई और 5 दिसंबर 12 को अभय की हत्या कर दी गई।

अभय के पिता वीरेंद्र सिंह ने आबकारी अफसर महेंद्र सिंह व उसके करीबी लोगों पर ऑनर किलिंग का आरोप लगाते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई थी। मामला सीबीसीआईडी के पास पहुंचा। सीबीसीआईडी ने चार लोगों के खिलाफ चार्जशीट तैयार की थी। इनमें नित्यानंद को 20 सितंबर 14 को गिरफ्तार किया था, जबकि ज्ञानेंद्र ने कोर्ट में आत्मसमर्पण किया जबकि फारूख की हत्या हो गई। नेहा फरार थी।
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भाड़े के हत्यारे का भी कत्ल

सीबीसीआईडी ने पड़ताल में पाया कि भाड़े के हत्यारे नित्यानंद श्रीवास्तव व मो फारूख ने आबकारी सिपाही ज्ञानेंद्र उर्फ पप्पू सिंह के साथ मिलकर अभय सिंह की हत्या की थी।

साजिश में नित्यानंद की पत्नी नेहा भी शामिल थी। इन चार लोगों की तलाश शुरू हुई थी तो पता चला कि सात लाख की सुपारी पर अभय की हत्या के बाद नित्यानंद ने फारूख को भी ठिकाने लगा दिया था।

बेटे की हत्या पर वीरेंद्र सिंह ने आबकारी अफसर महेंद्र सिंह, उनके बेटे, आबकारी में सिपाही उसके भाई समेत सात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। जैदपुर थाने से हत्या की तफ्तीश विकासनगर पुलिस को सौंपी।

पड़ताल में पता चला कि साजिश के चलते आरोपियों ने पांच नए मोबाइल व छद्म नाम पते से सिमकार्ड खरीदे थे। सुबूत जुटाने के साथ विकासनगर पुलिस ने नामजद आरोपियों पर शिकंजा कसना शुरू किया।

इस पर महेंद्र सिंह की पत्नी ने पर्यटन राज्यमंत्री मूलचंद चौहान से तफ्तीश स्थानांतरित कराने की मांग की और तफ्तीश सीबीसीआईडी को सौंप दी गई। इस बीच विकासनगर पुलिस ऑनरकिलिंग का इशारा करते हुए तफ्तीश आगे बढ़ा चुकी थी।
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