छह पुलिसवालों को बेहोश कर फरार हुआ शातिर अपराधी सौरभ शर्मा शहर में आपराधिक घटनाओं को अंजाम देने के लिए गैंग बनाने की तैयारी में था।
निशाने पर शहर के कई बड़े व्यवसायी थे। जिनको अपहरण कर फिरौती वसूलने की फिराक में था।
व्यापारियों की बीच अपने नाम की दहशत फैलाने के लिए हजरतगंज के एक नामी व्यवसायी की हत्या करना चाहता था।
इस हत्या से उसे रायबरेली रोड पर विवादित साढ़े तीन बीघा जमीन का आधा हिस्सा मिलना था।
सोमवार को तिहाड़ जेल से लखनऊ पहुंचने पर जीआरपी ने रिमांड पर लेकर पूछताछ की, जिसमें सौरभ ने अपने प्लान का खुलासा किया।
आजीवन कारावास की सजा के कारण हाई रिस्क श्रेणी के कैदी सौरभ को दिल्ली पुलिस नीलांचल एक्सप्रेस से लेकर लौट गई।
साउथ सिटी निवासी सौरभ शर्मा पर थाना मोहनलालगंज में हत्या, रेप और गैंगेस्टर के मामले दर्ज है।
पूछताछ में सौरभ शर्मा ने बताया कि रिटायर्ड पीसीएस सूबेदार सिंह ने वर्ष 2008 में रायबरेली रोड की साढ़े तीन बीघा जमीन को लेकर हजरतगंज के व्यापारी को रास्ते से हटाने की सुपारी दी थी।
इससे पहले कि व्यापारी की हत्या करता दिल्ली में गुजरात के हीरा व्यापारी के अपहरण के मामले में पकड़ गया।
व्यापारी को छोड़ने के एवज में सौरभ ने ढाई करोड़ रुपये की फिरौती मांगी थी। इस मामले में सौरभ को आजीवन कारावास की सजा हुई थी।
तिहाड़ जेल में सजा काट रहा सौरभ 20 जून को पेशी पर लखनऊ आया था। वापसी में अपने साथी प्रवेश मिश्र और हिमांशु जायसवाल की मदद से दिल्ली पुलिस के एएसआई धरमवीर सिंह, एक हेड कांस्टेबल और चार कांस्टेबल को बेहोश कर फरार हो गया था।
पहले नशे की गोली दी फिर फोन कर बताया
सौरभ शर्मा ने पूछताछ में बताया कि लस्सी में नशे की गोलियां बहुत ज्यादा पड़ गई थी।
दिल्ली पुलिसवालों की मौत न हो जाए इसके लिए उसने गिरफ्त से भागते ही स्टेशन के बाहर लगे पीसीओ से 100 नंबर पर फोन कर उनके अचेत पड़े होने की जानकारी दी थी।
लखनऊ जेल से चलाना चाहता था गैंग
सौरभ ने बताया कि तिहाड़ जेल में उसके साथ सही व्यवहार नहीं होता था। घरवाले भी मिलने नहीं आते थे।
ऐसे में लखनऊ से फरार होकर यहां वापस एक गैंग बनाकर सरेंडर करना चाहता था। इसके बाद उसे लखनऊ जेल में ही रखा जाता और वहीं से वह गैंग चलाता।
दिल्ली पुलिस से हो गई थी हमदर्दी
सौरभ शर्मा पांच बार से पेशी से भागने की फिराक में था। हर बार उसे लखनऊ लाने का जिम्मा दिल्ली पुलिस का एएसआई धरमवीर सिंह को सौंपा जाता था।
सौरभ ने बताया कि धरमवीर बहुत सीधे व्यक्ति थे। इसी के चलते पेशी से भागने की योजना टाल देता था।
जब उनकी ड्यूटी नहीं बदली तो मजबूरी में बेहोश कर भागना पड़ा। अपने बयान में सौरभ दिल्ली पुलिस को बचाता रहा।
कहा कि उसने दिल्ली पुलिस का खाना खाया था। जबकि जीआरपी को सौरभ की मां ने अपने हाथ से खाना खिलाने की बात बतायी थी।