लखनऊ के आशियाना में सात साल की बच्ची से दरिंदगी के मामले में पुलिस ने महेश पाल (20) नाम के शख्स को दबोचा लिया है। एसएसपी मंजिल सैनी ने दावा किया है कि महेश ने गुनाह कुबूल कर लिया है। बदायूं के बिल्सी थाना क्षेत्र का रहने वाला महेश लाई-चना बेचता है और बच्ची के पड़ोस में ही रहता है।
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रविवार को उसकी शिनाख्त कराई जाएगी। हालांकि शुक्रवार रात भी पुलिस ने एक संदिग्ध को पकड़कर वारदात का खुलासा करने की जल्दबाजी दिखाई थी लेकिन सुबह बच्ची ने फोटो देखकर उसे पहचानने से इन्कार कर दिया।
एसएसपी ने वॉट्सएप पर जानकारी दी कि इस मामले में कई संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही थी। इसमें महेश भी शामिल था। शनिवार रात पूछताछ के दौरान आरोपी के जुर्म कुबूलने का पता चलते ही रात में ही एसएसपी क्राइम ब्रांच के ऑफिस पहुंच गई। उन्होंने खुद आरोपी से पूछताछ की। रात को ही आरोपी का फोटो लेकर पुलिस अस्पताल पहुंची लेकिन बच्ची सो रही थी इसलिए पहचान नहीं कराई जा सकी।
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54 सेकंड की कॉल से पकड़ा गया दरिंदा
आरोपी महेश पाल
एएसपी क्राइम ने बताया कि दरिंदा जब बच्ची से हैवानियत कर रहा था, तब वह रोने लगी। दरिंदे ने उसका मुंह दबाया तो बच्ची ने उसे काट लिया। बात न बनने पर उसने बच्ची से पापा से बात कराने की बात कही।
बच्ची को बहलाने के लिए उसने नंबर डायल कर दिया, लेकिन फोन काटना भूल गया। उसे अंदाजा था कि उसने फोन मिलाकर तुरंत काट दिया है।
हैवानियत के दौरान 54 सेकंड तक कॉल चलती रही और बच्ची के पिता उसकी चीख सुनते रहे। पुलिस ने इसी कॉल के आधार पर आरोपी के फोन नंबर को सर्च किया और उसे पकड़ा जा सका।
किरायेदारों के सत्यापन में छांटे थे 53 लोग
शुक्रवार को किला मोहम्मदी और आसपास के इलाके में किरायेदारों के सत्यापन का अभियान चलाया गया। एसएसपी ने बताया कि 250 लोगों का सत्यापन किया गया। इसमें से 20 से 25 वर्ष उम्र वर्ग के 53 लोग चिह्नित किए गए थे। सभी के वोटर आईडी, फोटो और मोबाइल नंबर ले लिए गए हैं। इन सभी का फोटो बच्ची को दिखाकर पहचान कराई जानी थी।
बच्ची से बातचीत में मिली थीं नई जानकारियां
एसएसपी शनिवार दोपहर अस्पताल पहुंची और बच्ची से बातचीत की। करीब एक घंटे की बातचीत में बच्ची ने कई नई जानकारियां एसएसपी को दी थीं। एसएसपी ने बताया कि बच्ची से मिली जानकारियों के आधार पर पुलिस टीम को निर्देश दिए गए थे जिसके चलते रात को सफलता मिल गई।
संदिग्धों की कराई गई डीएनए सैंपलिंग
एसएसपी ने बताया कि हिरासत में लिए गए सभी संदिग्धों की डीएनए सैंपलिंग कराई गई है। इन सभी के सैंपल बच्ची के शरीर से मिले सैंपल से मैच कराए जाएंगे। अगर बच्ची हैवानियत करने वाले दरिंदे को नहीं पहचान पा रही है या किसी असमंजस में है तो डीएनए सैंपलिंग से उसे पकड़ा जा सकता है।
दहशत में है मासूम, संदिग्धों को पेश कराने से रोका
अस्पताल के आईसीयू में भर्ती मासूम दहशत में है। रह-रहकर हैवानियत की याद कर सिहर उठती है। शुक्रवार रात पुलिस संदिग्ध को अस्पताल लेकर आई लेकिन परिवारीजनों ने उसकी हालत देखते हुए बच्ची के सामने ले जाने से रोक दिया।
सर्जरी के बाद चिकित्सकों ने कुछ घंटों के लिए बच्ची का खाना-पानी बंद कर रखा है। उसकी मानसिक अवस्था भी ठीक नहीं है।
परिवारीजनों का कहना था कि बच्ची अगर दरिंदे को पहचान लेगी तो उसकी हालत और बिगड़ सकती है। परिवारीजनों की आपत्ति के बाद पुलिस ने सभी संदिग्धों की फोटो बच्ची को दिखाने का फैसला किया।
अस्पताल पहुंचे महिला संगठन पर बच्ची से नहीं मिलने दिया
शनिवार को महिला संगठन की सदस्य अस्पताल पहुंची लेकिन उन्हें बच्ची से नहीं मिलने दिया गया। एडवा की मधु गर्ग सहित कई महिला संगठन की पदाधिकारियों ने मासूम के परिवारीजनों से बातचीत कर घटना के बारे में जानकारी ली।
कुछ महिलाओं ने बच्ची से जबरन मिलने की कोशिश की तो हंगामा भी हुआ। मधु गर्ग ने बच्ची के परिवारीजनों को कानूनी लड़ाई में हर संभव मदद करने का भरोसा दिलाया है।
परिवारीजनों ने बताया कि बच्ची को संक्रमण की आशंका है इसलिए चिकित्सकों ने परिवारीजनों के अलावा किसी भी व्यक्ति को आईसीयू में प्रवेश देने से मना किया है।
हैवानियत की शिकार बच्ची के परिवारीजनों ने उसकी जान पर खतरे की आशंका जताई है। पिता का कहना है कि आरोपी मोहल्ले का ही निकलने के बाद परिवार पर खतरा बढ़ गया है।
आरोपी खुद को बचाने के लिए बच्ची या परिवार के किसी सदस्य को नुकसान भी पहुंचा सकता है। उन्होंने एसएसपी से सुरक्षा की मांग की है। दरिंदे की दहशत के चलते परिवारीजनों ने रिश्तेदारों को अस्पताल बुला लिया है।
सभी अस्पताल के आईसीयू के आसपास मौजूद रहते हैं और हर आने-जाने वाले के बारे में पूछताछ करते हैं। एसएसपी ने स्थानीय पुलिस को अस्पताल व बच्ची के घर पर सतर्कता बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।