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ठगा गया तो खोल दी ठगी की दुकान!

Mon, 02 Feb 2015 09:54 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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नौकरी के झांसे में ठगा गया तो ठगी की दुकान ही खोल डाली। हजरतगंज में राजा रामकुमार प्लाजा में 60 हजार रुपये महीने पर दफ्तर लिया और ठगी के लिए ग्लोब मल्टी लिंक के नाम से कंपनी बना डाली। रेलवे में टीसी और 108 एंबुलेंस में ईएमई की नौकरी दिलाने के झांसे में दो साल में 250 को फंसाया। इनसे करीब ढाई करोड़ रुपये ऐंठ लिए। क्राइम ब्रांच की टीम ने रविवार को ऑफिस के संचालक आशीष कुमार शुक्ला को दबोच लिया।
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एएसपी क्राइम दिनेश सिंह ने बताया कि बेरोजगारों से ठगी की शिकायत पर एसआई फजल उर्रहमान, रामनरेश सिंह, कांस्टेबल रूपेंद्र शर्मा व मो. शरीफ की टीम ने रविवार सुबह ग्लोब मल्टी लिंक के ऑफिस पर छापा मारा।

विकासनगर के सेक्टर-5 निवासी आशीष को दबोचा गया। उसने कुबूला कि दो साल पहले ऑफिस खोला और साथ में पढ़ी पांच युवतियों व हिमांशु नामक युवक की मदद से बेरोजगारों से ठगी कर रहा था। रजिस्ट्रेशन के नाम पर बेरोजगारों से दस हजार रुपये जमा कराने के साथ नौकरी के लिए खानापूर्ति के नाम पर किस्तों में एक लाख रुपये झटक लेता था।
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5 लाख रुपए में नौकरी तय

ये ठग पांच लाख में नौकरी का सौदा तय करता था और चार लाख रुपये नौकरी मिलने के बाद जमा करने को कहकर आसानी से विश्वास में ले लेता था। इस तरह दो साल में 250 लोगों को ठगी का शिकार बनाकर ढाई करोड़ रुपये से अधिक कमा चुका है।

युवाओं को लूट रही ग्लोब मल्टी लिंक के ऑफिस से टीसी के 48 फर्जी नियुक्ति पत्र, 102 व 108 एंबुलेंस सेवा के फर्जी प्रशिक्षण पत्र, 199 रजिस्ट्रेशन फार्म, 121 बेरोजगारों के बायोडाटा, 12 लोगों के अंकपत्र, नौ प्रमाणपत्र, अनेक लोगों के नाम व मोबाइल नंबरों की सूची, डेस्कटॉप, प्रिंटर, सीपीयू, मेडिकल प्रमाणपत्र, पुलिस सत्यापन फार्म व चार बैंकों के डेबिट कार्ड बरामद हुए।

एएसपी दिनेश सिंह के मुताबिक जाली दस्तावेज इस तरह से तैयार किए गए थे कि वे असली जैसे नजर आते हैं। आशीष की रेलकर्मियों से साठगांठ की आशंका के चलते तहकीकात की जा रही है।
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ऐसे फांसता था शिकार

मोबाइल नेटवर्क कंपनियों से हासिल नाम और नंबरों की सूची के आधार पर चारों युवतियों द्वारा युवकों को कॉल करके रेलवे व एंबुलेंस सेवा में नौकरी की जानकारी दी जाती थी। लच्छेदार बातों से बेरोजगार को रजिस्ट्रेशन के लिए आमंत्रित किया जाता।

हजरतगंज में शानदार ऑफिस में बैठे आशीष के इशारे पर उसका सहयोगी हिमांशु रजिस्ट्रेशन के दौरान बेरोजगारों को समझाता कि सैकड़ों लोग परीक्षा व इंटरव्यू देते हैं। इसमें सेटिंग व अन्य खानापूर्ति में एक लाख रुपये का खर्च आता है जो किस्तों में देना होगा और शेष चार लाख रुपये नौकरी ज्वाइन करने के बाद चुकाने होंगे।

इस तरह लोग दस हजार जमा करके रजिस्ट्रेशन कराते और किस्तों में एक लाख रुपये दे डालते थे। महीनों चक्कर कटवाने के बाद आशीष उन्हें फर्जी नियुक्ति पत्र थमा देता था। ज्वाइनिंग के समय भंडाफोड़ होने पर नियुक्ति पत्र में तकनीकी खामी बताकर काफी दिनों तक फिर टालमटोल करता था।
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