ममता ने एक वीडियो में बताया कि पति अशोक नवरात्र का व्रत थे। इसके बावजूद मैनेजर उनसे 18 घंटे तक काम ले रहे थे। इस प्रताड़ना से वे इतना परेशान थे कि तीन दिन से कुछ खाया तक नहीं था। अवसाद में आकर शनिवार को उन्होंने आत्महत्या कर ली। अशोक ने पत्नी ममता, बेटी शिवानी व बेटे शशांक के नाम भी नोट लिखा है। इसमें लिखा कि उनकी मौत के बाद कोई भी क्लेम लेने पर्यटन निगम कार्यालय न जाए।
गोमती होटल निजी हाथों में देने की साजिश
अशोक पाठक की बेटी शिवानी ने बताया कि पिता 32 से नौकरी कर रहे थे। बीमारी के बाद भी वे हर हाल में 10 बजे ड्यूटी पर पहुंच जाते थे। वहीं, उनके लौटने का कोई समय नहीं होता था। कभी रात के तीन तक बज जाते थे, लेकिन ईमानदारी से नौकरी का उन्हें ये सिला मिला। शिवानी का आरोप है कि पर्यटन विभाग के कुछ अधिकारी गोमती होटल को घाटे में दिखाकर निजी हाथों में देना चाहते थे। उनके पिता इसमें बाधक बन रहे थे। वह ईमानदारी से ड्यूटी करके बार को घाटे में जाने नहीं दे रहे थे। आरोप लगाया कि इसी कारण उसके पिता को प्रताड़ित किया जा रहा था, ताकि वे नौकरी छोड़ दें या सुसाइड कर लें।
शिवानी ने बताया कि नौ सितंबर को उनके पिता ने गलत बिल बनाने को लेकर वेटर सुरेश को फटकारा था। दो दिन बाद सुरेश ने माफी मांग ली थी। इसके बाद दोनों में कोई विवाद नहीं रह गया था। उनमें पहले ही तरह बातचीत भी होती थी। सुरेश की मौत के बाद उनके परिजन ने भी अशोक पर कोई आरोप नहीं लगाया। पारा थाने के उपनिरीक्षक पटेल सिंह राठी ने भी बताया कि सुरेश के घरवालों ने न तो कोई तहरीर दी और न ही किसी पर कोई आरोप लगाया है। इसके बावजूद पर्यटन विभाग का कोई अधिकारी बार-बार अशोक को फोन करके सुरेश की मौत के मामले में जेल जाने की बात कहकर डरा रहा था।