पीजीआई थाना क्षेत्र के बाबूखेड़ा में शुक्रवार रात सपेरों की बस्ती की एक झोपड़ी में आग लग गई। धुआं भरने पर जागे पति-पत्नी अपने तीन छोटे बच्चों को लेकर बाहर भागे, जबकि दो मासूम बेटियां जिंदा जल गईं।
बाबूखेड़ा में सपेरों की बस्ती में रहने वाले बबलू नाथ की झोपड़ी में शुक्रवार रात 10:30 बजे आग लग गई। बबलू नाथ व उसकी पत्नी मुग्धी देवी की चीख-पुकार पर दौड़े आसपास के लोगों ने आग बुझाने का प्रयास शुरू किया।
मौके पर पहुंचे दमकल दस्ते ने थोड़ी देर में आग पर काबू पा लिया। हालांकि इस दौरान झोपड़ी में सो रही रंजू (8) और इंदु (3) लपटों के बीच घिरकर जिंदा जल गईं। राख के ढेर में दोनों बच्चियों के जले हुए शव मिले।
बेटियों की मौत पर बिलख रहे दंपती ने बताया कि रोज की तरह शुक्रवार को भी मजदूरी करके लौटे। खाना खाने के बाद बबलू और मुग्धी अपने पांच बच्चों के साथ लेटे थे।
झोपड़ी में जल रही मोमबत्ती को सोने से पहले बुझाने का इरादा बनाया था, लेकिन नींद आ गई। रात 10:30 बजे सांस लेने में दिक्कत होने पर बबलू जागा तो झोपड़ी में धुआं भरा था। उसने पत्नी को जगाया।
मुग्धी अपने दस दिन के बेटे अंदीप को साथ लेकर बाहर भागी, जबकि बबलू उससे बड़े संदीप व बेटी रंजना को लेकर झोपड़ी से निकला। बबलू ने कहा कि समझदार रंजू और इंदु के खुद बाहर भाग आने की उम्मीद थी।
दोनों बेटियां बाहर नजर न आने पर आवाज दी। इस बीच, पूरी झोपड़ी लपटों से घिर चुकी थी। जांच में जुटी पुलिस का मानना है कि झोपड़ी में भरे धुएं से दोनों बच्चियों का दम घुट गया। इस बीच चारों तरफ फैली आग ने उन्हें जला डाला।