यूपी में हत्या, रेप और डकैती की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। इसका कारण कहीं न कहीं खुद कानून ही है। अखिलेश सरकार में कानून तोड़ने वालों को ही कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी दे दी गई है।
सिर्फ लखनऊ मंडल में दो साल या इससे ऊपर की सजा वाले मामलों में आरोपी 127 पुलिस वाले थानों पर तैनात हैं। इनके अलावा भी ऐसे ही 47 पुलिसकर्मियों से अन्य काम लिया जा रहा है।
कानपुर मंडल में ऐसे 14 कर्मचारियों से काम लिया जा रहा है। कानपुर में तो छह पुलिस वाले अब भी जेल में बंद हैं।
यह जानकारी विधान परिषद में अरविंद त्रिपाठी उर्फ गुड्डू के सवाल के जवाब में सरकार की तरफ से दी गई।
यूपी में 30 फीसदी बढ़ी रेप की घटनाएं
सरकार भले ही सार्वजनिक रूप से कानून-व्यवस्था पर नियंत्रण का दावा कर रही हो लेकिन सूबे में आपराधिक घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी जारी है।
पिछले वर्ष की तुलना में इस साल जनवरी से मार्च के बीच बलात्कार की घटनाओं में 30 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है।
आम लोगों की सुरक्षा के लिए तैनात पुलिस खुद अपनी सुरक्षा नहीं कर पा रही है। खुद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शुक्रवार को विधान परिषद में लिखित जवाब में यह तथ्य स्वीकार किया है।
इस तरह बढ़े अपराध
कांग्रेस के नसीब पठान के सवाल पर मुख्यमंत्री की ओर से आए जवाब में बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में इस साल बलात्कार में 30, हत्या में 10, डकैती में 9 और लूट में 12 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इस साल जनवरी से मार्च तक 1209 हत्याएं, 51 डकैती, 736 बलात्कार और 783 लूट की घटनाएं घटीं।
थम नहीं रहे थानों पर हमले--भाजपा के हृदयनारायण दीक्षित के सवाल पर मुख्यमंत्री की तरफ से लिखित उत्तर में बताया गया कि इसी वर्ष जनवरी से लेकर मई तक थानों पर सात हमले और पुलिस चौकियों पर 10 हमले हुए थे।
वर्ष 2012 में थानों पर हमले की 8 घटनाएं घटी थीं तो 2013 में 23 घटनाएं घटीं। इस वर्ष मई तक 7 घटनाएं घट चुकी हैं। पुलिस चौकी पर हमले की 2012 में 12, 2013 में 9 घटनाएं घटी थीं तो इस बार मई तक ही 10 घटनाएं हो चुकी हैं।
पुलिस पर हमले की 2012 में 165 और 2013 में 242 घटनाएं हुई थीं। इस बार मई तक ही 60 घटनाएं घट चुकी हैं।