इस मामले में लालजी सहाय और कृष्ण स्वरूप गौड़ की गवाही होनी है, लेकिन दोनों हाजिर नहीं हो रहे हैं। इस पर कोर्ट ने दोनों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करते हुए पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखा था जो डीजीपी कार्यालय में पांच नवंबर को प्राप्त हो चुका है।
इसके बावजूद कोई गवाह कोर्ट में हाजिर नहीं हुआ, न ही डीजीपी कार्यालय ने कोई रिपोर्ट कोर्ट में भेजी। वहीं, सरकारी वकील ने अदालत को बताया कि गवाह लालजी सहाय की मृत्यु हो चुकी है।
ऐसा लचर रवैया आरोपी के हित को दर्शाता है
अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार के मामले में ऐसा लचर रवैया आरोपी के हित को दर्शाता है। पुलिस महानिदेशक राज्य का सर्वोच्च पुलिस अधिकारी होता है और उनकी ओर से कोई कड़ा कदम नहीं उठाया जा रहा है।
इससे ऐसा लगता है कि डीजीपी या तो गवाह को पेश करने में रुचि नहीं रखते या वह कोर्ट के आदेशों की ओर ध्यान नहीं देना चाहते। ऐसी स्थिति को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।