लखनऊ। अपहरण के एक मामले में जमानत पर सुनवाई के समय केस डायरी कोर्ट में पेश न करने और कोर्ट के आदेश के बाद भी गोमतीनगर के विवेचक सौरभ तिवारी के खिलाफ कार्रवाई न करने पर पाक्सो एक्ट के विशेष न्यायाधीश महेश चंद्र वर्मा ने पुलिस कमिश्नर से स्पष्टीकरण तलब किया है। अगली सुनवाई 22 सितम्बर को होगी।
कोर्ट ने इस लापरवाही पर पुलिस कमिश्नर को नोटिस भेजकर उनको स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया है कि वह 22 सितंबर तक अपना स्पष्टीकरण कोर्ट में पेश करें और बताएं 15 सितंबर के आदेश के बावजूद भी केस डायरी कोर्ट में क्यों नहीं पेश की गई और केस डायरी पेश न करने का कारण क्यों नहीं दिया गया। कोर्ट ने कहा कि इसके चलते जमानत प्रार्थना पत्र की सुनवाई में बाधा हो रही है, इसलिए उनके विरुद्ध कार्रवाई क्यों न की जाए।
गत 15 सितंबर को कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि अपहरण के मामले के आरोपी संजय गौतम की जमानत अर्जी पर सुनवाई के समय थाने से आई रिपोर्ट में दरोगा सौरभ तिवारी ने बताया कि आरोपी के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट भेजा जा चुका है लेकिन जब कोर्ट ने निचली अदालत से चार्जशीट तलब की तो पता चला कि अभी तक कोर्ट में चार्जशीट ही नहीं आई है। कोर्ट ने कहा कि विवेचक ने चार्जशीट दाखिल किए जाने की झूठी बात कोर्ट से कही है। इस पर कोर्ट ने कमिश्नर को निर्देशित किया था कि विवेचक के खिलाफ कोर्ट में झूठा कथन पेश करने के लिए विभागीय कार्रवाई कर उसे विधि के अनुसार दंडित करें और अपनी आख्या 20 दिन में कोर्ट को भेजें।
इसके अलावा कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर को यह भी आदेश दिया था कि थानाध्यक्ष गोमतीनगर को निर्देशित करें कि वह 17 सितंबर तक केस डायरी न्यायालय में पेश करें। अदालत के इस आदेश के बावजूद सोमवार को सुनवाई के समय न तो केस डायरी पेश की गई और न ही विवेचक सौरभ तिवारी के विरुद्ध कार्रवाई किए जाने से संबंधित कोई रिपोर्ट पेश की गई।