डॉ. रईस ने बताया कि ट्रायल में कोई भी गंभीर मरीज नहीं रखा गया। पहले समूह के 28 मरीजों की पांच दिन में ही रिपोर्ट निगेटिव आ गई। दूसरे के 26 मरीजों की पांच दिन में रिपोर्ट निगेटिव आई तो तीसरे समूह के 17 मरीजों की रिपोर्ट पांच दिन में निगेटिव आई। इसके बचे मरीजों की रिपोर्ट 10 से 14 दिन में निगेटिव आई। परिणाम बेहतर आने के बाद 30 अन्य रोगियों पर ट्रायल होगा।
खुद ही बना रहे काढ़ा
डॉ. रईस ने बताया कि आयुष मंत्रालय की ओर से दिए जाने वाले काढ़े को मरीजों पर प्रयोग नहीं किया गया। अस्पताल में कटकारी, सोंठ, गिलोय, पिपली समेत अन्य जड़ी-बूटी मिलाकर काढ़ा तैयार किया जा रहा है।
शोध की ली गई थी स्वीकृति
निदेशक डॉ. डीएस नेगी ने बताया कि इस शोध के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन उप्र. ने फंड भी दिया था। वहीं, शोध के लिए सीटीआरआई से स्वीकृति ली गई थी। सीसीआरएएस के दिशा-निर्देश के अनुसार ही मरीजों के लक्षणों का दवा के प्रयोग से पहले और बाद में आकलन किया गया।