देखने में आया है कि नवनिर्मित सड़कें दो साल के बाद तेजी से खराब होने लगती हैं। जबकि, नियम के अनुसार ग्रामीण सड़कों का नए सिरे से निर्माण आठ साल बाद, ओडीआर का पांच साल, एमडीआर व स्टेट हाईवे का नवीनीकरण चार साल बाद ही कराया जा सकता है।
ऐसे में नवीनीकरण होने से पहले काफी समय तक सड़कें राहगीरों के लिए मुसीबत बनी रहती हैं। इस समस्या से निजात दिलाने के लिए पांच साल तक रखरखाव का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
पांच साल तक के रखरखाव के लिए संबंधित ठेकेदार को इस मद में कुछ अतिरिक्त राशि भी दी जाएगी। यह सड़क की कुल लागत के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी। वहीं, पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों का कहना है कि इससे सड़कें सही हालत में रहेंगी और नवीनीकरण पर होने वाले खर्च में कमी आएगी।
प्रमुख सचिव, पीडब्ल्यूडी नितिन रमेश गोकर्ण ने कहा कि सड़कों के डिफेक्ट लाइबिलिटी पीरियड को बढ़ाकर पांच साल करने पर संजीदगी से विचार किया जा रहा है।