राजधानी में कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ने के साथ ही सरकारी अस्पतालों में लिक्विड ऑक्सीजन की खपत दस गुना तक बढ़ गई है। पहले जहां 1000 जंबो सिलेंडर की खपत रोजाना थी। वहीं, अब इनकी संख्या दस हजार सिलेंडर तक प्रतिदिन हो गई है। डॉक्टरों का कहना है कि अगर कोरोना मरीज ऐसे ही बढ़ते रहे तो आने वाले दिनों में संकट गहरा जाएगा। क्योंकि ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी जानबूझकर मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं कर रही है।
वहीं, स्वास्थ्य विभाग के अफसर कंपनियों को नोटिस जारी करके आपूर्ति कराने में कामयाब रहे। हालांकि निजी सेंटरों को मांग के अनुुरूप सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं। निजी सेंटर संचालकों का आरोप है कि ऑक्सीजन सिलेंडर पहले की अपेक्षा अधिक दाम पर मिल रहे हैं। ऐसे में इलाज भी महंगा होता जा रहा है।
केजीएमयू में एक हजार जंबो सिलेंडर की जरूरत रोजाना
केजीएमयू में कोरोना मरीजों संग सामान्य मरीजों का भी इलाज चल रहा है। हालांकि सर्जरी कुछ ही विभागों में चल रही है। ऐसे में ऑक्सीजन की खपत पर खास प्रभाव नहीं पड़ा है। ऑक्सीजन लिक्विड गैस के इंचार्ज डॉ. संदीप तिवारी ने बताया कि केजीएमयू में ऑक्सीजन सिलेंडर के हर विभाग में टैंक बने हैं। कोरोना से पहले करीब आठ सौ सिलेंडर की खपत रोज थी। कोरोना की वजह से अब एक हजार सिलेंडर रोजाना की खपत हो रही है।
लोकबंधु : पहले दस सिलेंडर अब सौ की मांग
कोरोना काल से पहले लोकबंधु अस्पताल में हर रोज दस सिलेंडर की मांग थी। कोविड हॉस्पिटल बनने के बाद अब रोजाना करीब 100 सिलेंडर की खपत हो रही है। सीएमसस डॉ. अमिता यादव के मुताबिक, निजी कंपनी बीच में मांग के अनुरूप सिलेंडर देने में आनाकानी कर रही थी। नोटिस जारी कर निजी कंपनी को काली सूची में डालने और एपेडमिक एक्ट के तहत कार्रवाई का दबाव बनाया गया तो सिलेंडर की आपूर्ति बराबर कर रही है।