प्रदेश में वर्ष 2018 में स्मार्ट मीटर लगने शुरू हुए थे। इसके साथ ही राजधानी में इसके तेज चलने की शिकायतें आने लगीं। इस पर उपभोक्ता परिषद ने नियामक आयोग से इसकी जांच कराने के अनुरोध किया था। तब पावर कॉर्पोरेशन के निर्देश पर मध्यांचल विद्युत वितरण निगम ने वर्ष 2019 में स्मार्ट मीटर वाले किन्हीं दो उपभोक्ताओं के परिसर में चेक मीटर लगाकर परीक्षण करने का आदेश दिया।
लेसा के अपट्रॉन व ठाकुरगंज उपकेंद्र के अंतर्गत पांच उपभोक्ताओं के घर पर स्मार्ट मीटर के समानांतर चेक मीटर लगवाकर जांच कराई गई। इसमें पता चला ठाकुरगंज में तीन उपभोक्ताओं के स्मार्ट मीटर कई सौ गुना तेज चल रहे थे। यही नहीं, इन सभी उपभोक्ताओं का भार कई गुना अधिक पाया गया। मगर बिजली अधिकारी मीटर आपूर्तिकर्ता कंपनी पर कार्रवाई करने के बजाय उनकी पैरवी में लगे रहे।
सीपीआरआई की जांच में भी स्मार्ट मीटर फेल
भार जंपिंग की शिकायतें मिलने पर कुछ स्मार्ट मीटरों को जांच के लिए सेंट्रल पावर रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीपीआरआई) भेजा गया था। जहां ये मीटर मानकों पर खरे नहीं पाए गए। कुछ मीटरों की जांच रिपोर्ट पहले ही आ जाने के बावजूद अधिकारी उसे दबाए रहे। इस पर पावर कार्पोरेशन प्रबंधन ने अब संबंधित अभियंताओं से जवाब तलब किया है।
स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को समय से रीडिंग आधारित बिल नहीं मिल पा रहे हैं। इसी साल अक्तूबर में लखनऊ, अलीगढ़, मथुरा, वृंदावन, बाराबंकी, बरेली, प्रयागराज, गोरखपुर, वाराणसी, मेरठ व सहारनपुर के 29,469 स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के बिल समय पर नहीं बन सके।
सूत्रों का कहना है कि पुरानी तकनीक के 2जी व 3जी के स्मार्ट मीटरों में ये समस्या आ रही है, लेकिन अधिकारी इसे अपग्रेड कराने में दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। वहीं, उपभोक्ताओं की यह भी शिकायत है कि पैसा जमा होने के बाद भी बकाये पर उनका कनेक्शन काट दिया जाता है। इस तरह की कई शिकायतें राज्य विद्युत नियामक आयोग में भी विचाराधीन हैं।
ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा का कहना है कि स्मार्ट मीटर को लेकर मिल रही शिकायतों पर पावर कॉर्पोरेशन व बिजली कंपनियों के अधिकारियों ने सही तरीके से मॉनिटरिंग नहीं की। इससे महत्वाकांक्षी परियोजना प्रभावित हो रही है। उपभोक्ताओं से फीडबैक मिलने के बाद उनके हितों का ध्यान रखते हुए स्मार्ट मीटर पर निर्णय किया जाएगा।