लखनऊ दुग्ध संघ यानी पराग को कंगाल करके बंद करने की साजिश रची गई है। इसके लिए घाटे में चल रहे चार दुग्ध संघ सीतापुर, हरदोई, उन्नाव व रायबरेली का पराग में विलय कर एक क्लस्टर बनाने की तैयारी है।
क्लस्टर बनने से घाटे में चले रहे दुग्ध संघों के कर्मियों के वेतन एवं रिटायरमेंट का बोझ पराग को उठाना पड़ेगा जिससे वह दिवालिया हो जाएगा। ऐसा होते ही पराग सहित सभी दुग्ध संघों को निजी हाथों में सौंप दिया जाएगा।
पांच दुग्ध संघों का क्लस्टर बनाने के लिए शुक्रवार को गन्ना संस्थान में एक अधिवेशन बुलाया गया जिसमें संघ के अध्यक्षों एवं कर्मचारी प्रतिनिधियों ने शासन के फैसले को खारिज कर दिया। कर्मचारी प्रतिनिधियों का कहना है कि हरदोई, सीतापुर, उन्नाव व रायबरेली के चार दुग्ध संघ 21 करोड़ रुपये के घाटे में चल रहे हैं।
क्लस्टर बनने पर इन संघों के जो कर्मचारी एवं अधिकारी रिटायर होंगे उनके देयों के भुगतान का दायित्व पराग को उठाना पड़ेगा। आमदनी कम, खर्च अधिक होते ही पराग कंगाल हो जाएगा।
दरअसल, सभी दुग्ध संघों में हर महीने कुछ कर्मचारी रिटायर हो रहे हैं जिन्हें करोड़ों रुपये देने पड़ रहे हैं। जिन दुग्ध संघों को पराग से जोड़ने की तैयारी चल रही है, उनके रिटायर हुए कर्मियों को अब तक कई देयों का भुगतान नहीं किया गया है।