कोयला संकट के चलते विद्युत संयंत्रों में बिजली का उत्पादन जबरदस्त तरीके से गिरा है। केवल अगस्त माह के 13 दिनों में ही 30 करोड़ यूनिट बिजली का उत्पादन कम हुआ। अगस्त माह से अब तक प्रदेश में 53 करोड़ यूनिट का उत्पादन गिर गया। संकट से निपटने केलिए कोयले की डिमांड की जा रही है लेकिन फिलहाल कोई मजबूत समाधान नजर नहीं आ रहा है।
प्रदेश भर के विद्युत संयंत्रों को कोयले की पूरी आपूर्ति न होने से स्थिति अभी नियंत्रण में नहीं आ पा रही है। हालत यह है कि ग्रामीण क्षेत्र में 10 से 12 घंटे की अघोषित विद्युत कटौती की जा रही है। उधर शहरों में भी अघोषित कटौती में कमी नहीं हो पा रही है और इसकेबढ़ाया जा रहा है।
अहम बात यह है कि विद्युत उत्पादन लगातार गिर रहा है। स्थिति यह है कि हरदुआगंज में 12 हजार मीट्रिक टन कोयले का स्टॉक है जिससे मात्र डेढ़ दिन ही काम चलेगा। पारीछा में 14803 एमटी स्टॉक से घटकर स्टॉक 11 हजार पर आ गया है। ओबरा में 34 हजार एमटी केस्टॉक है यानि दो काम चल सकता है। अनपरा में 62 हजार मीट्रिक टन कोयला है जिससे डेढ़ दिन और संयंत्र चलाया जा सकता है। लगातार कोयले की डिमांड की जा रही है पर मांग के सापेक्ष बेहद कम आपूर्ति हो रही है।
पीक ऑवर में विद्युत आपूर्ति की रणनीति, और महंगी खरीदी बिजली
सरकार की कवायद यह है कि त्योहारी सीजन के चलते पीक ऑवर में बिजली आपूर्ति प्रभावित न हो। शाम छह बजे से रात दस बजे तक बिल्कुल भी कटौती न हो। सीएम योगी आदित्यनाथ भी रात को कटौती न करने के निर्देश दे चुकेहैं। बुधवार को ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने स्टेट लोड डिस्पेच सेंटर मुख्यालय पहुंचकर आपूर्ति की पूरी जानकारी ली और कहा कि शाम छह बजे से सुबह सात बजे तक कटौती न हो। योजना यह है कि स्ट्रीट लाइटें या अन्य ऐसी इमारातों में जहां रात को कटौती करने से काम चलाया जा सकता है वहां आपूर्ति बंद की जा सकती है। उसकी बजाया सामान्य सप्लाई जारी रखी जाए। जहां गत दिवस तक 15 रुपये 84 पैसे की दर से बिजली खरीदी गई थी तो वहीं बुधवार को 17 रुपये प्रति यूनिट की दर पर बिजली खरीदी गई।
दस हजार मेगावाट अतिरिक्त बिजली आपूर्ति : श्रीकांत शर्मा
ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने कहा है कि पिछली सरकारों के मुकाबले वर्तमान में दस हजार मेगावाट विद्युत आपूर्ति अतिरिक्त की जा रही है। इसलिए विपक्ष इसको अनावश्यक रूप से मुद्दा न बनाए। चूंकि महंगी बिजली खरीदी जा रही है तो उपभोक्ता भी इसे समझें और इसके अपव्यय को रोकें।
प्लांट के पास सिर्फ आठ घंटे का कोयला
एनटीपीसी ऊंचाहार में कोयले की आपूर्ति बढ़ गई है। इसके बावजूूद प्लांट में पूरी क्षमता से बिजली उत्पादन नहीं हो पा रहा है। वर्तमान में चार यूनिट चल रहीं थीं जबकि एक यूूनिट को मंगलवार को चलाया गया। अब भी एक यूनिट बंद चल रही है। उधर, पीआरओ कोमल शर्मा का कहना है कि मांग के अनुरूप बिजली उत्पादन किया जा रहा है। जल्दी ही बंद यूनिट को भी चलाया जाएगा। बुधवार की देर शाम 210-210 मेगावाट उत्पादन की क्षमता वाली यूनिट नंबर एक से 122 मेगावाट, तीन से 142, चार से 136, पांच से 128 व 500 मेगावाट की क्षमता वाली यूनिट छह 300 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। यूनिट नंबर दो मेंटीनेंस के लिए बंद है। परियोजना की बिजली उत्पादन क्षमता 1550 मेगावाट है। फिलहाल 53 प्रतिशत ही बिजली उत्पादन हो रहा है।