गांवों को पहले ही 18 घंटे के बजाय करीब 11 घंटे, तहसीलों को 21.30 घंटे के बजाय करीब 17 घंटे और बुंदेलखंड को 20 घंटे के बजाय करीब 14 घंटे ही आपूर्ति हो पा रही है। अब शहरों में घोषित तौर पर कटौती शुरू हो गई है। डेढ़ से साढ़े चार घंटे तक की कटौती शहरों में शुरू हो गई है। कहीं कहीं अघोषित तौर पर इससे ज्यादा कटौती की जा रही है।
खदानों से ही पर्याप्त निकासी नहीं
अत्यधिक वर्षा के कारण कोल खदानों से कोयले की आपूर्ति प्रभावित हुई।, इससे तापीय परियोजनाओं का कोल भंडार तो कम हो ही गया साथ ही खदानों से कोयले की पर्याप्त निकासी नहीं हो पा रही है। दूसरी ओर उमस और त्योहारी सीजन के कारण बिजली की मांग भी बढ़ोतरी हुई है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की कोल रिपोर्ट के अनुसार भारत में स्थापित 16 पिट हेड (कोयला खदान के मुहाने पर) की तापीय परियोजनाओं में से 9 के पास चार दिनों से कम का कोल भंडार है एवं 109 नान पिट हेड (1500 किमी से कम की दूरी पर स्थापित) तापीय परियेाजनाओं में से 23 के पास छह दिनों से कम तथा 69 तापीय परियोजनाओं के पास तीन दिन से कम का कोल भंडार बचा है।
पाॅवर कारपोरेशन अध्यक्ष की अपील, सहयोग करें कर्मचारी संगठन
उत्तर प्रदेश पाॅवर कॉरपोरेशन अध्यक्ष एम. देवराज ने आंदोलनरत अभियंताओं, अवर अभियंताओं एवं अन्य कर्मचारी संगठनों से अपील की है कि वे आंदोलन समाप्त करें। कोयले की समस्या एक नई चुनौती बनकर खड़ी हो गई है। इस समय प्रमुख त्योहारों का सीजन भी है। ऐसे में प्रदेश, विद्युत उपभोक्ता एवं विभागीय हित में आंदोलन समाप्त कर वार्ता के माध्यम से समस्याओं का हल निकालने का प्रयास होना चाहिए। उन्होंने कहा है कि कोरोना महामारी आदि कारणों से कॉरपोरेशन की वित्तीय स्थिति प्रभावित है। कारपोरेशन का घाटा 90 हजार करोड रुपये तक पहुंच गया है। ऐसी परिस्थितियों में कॅारपोरेशन कर्मचारियों के वेतन को बढ़ाकर अतिरिक्त आर्थिक बोझ को सहने की स्थिति में नहीं है। आंदोलन से कॉरपोरेशन की वित्तीय स्थिति और विद्युत आपूर्ति दोनों प्रभावित हो सकते हैं । यह प्रदेश, विद्युत उपभोक्ता और कॉरपोरेशन के लिए हितकर नहीं है।