सपा सदस्यों के आरोपों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश में 16 जनवरी से ही टीकाकरण प्रारंभ हो चुका था। हम सब जानते हैं कि वे कौन से चेहरे थे जो वैक्सीन को बीजेपी और मोदी का बताकर भ्रम फैला रहे थे। इनके कारण ही बड़ी संख्या में लोगों ने जान गंवाई। ये उन परिवारों के प्रति अपराधी हैं। कुछ लोगों की नकारात्मक टिप्पणी ने लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ किया। राज्यपाल की बुलाई सर्वदलीय बैठक का भी बहिष्कार किया।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में कोरोना के टीके जाति-मजहब और गांव-जिला देखकर नहीं लगाए जा रहे हैं। कोरोना से निपटने के लिए देश में सर्वाधिक टीकाकरण और टेस्ट यूपी में ही हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार ने संकट के इस दौर में जीवन और जीविका, दोनों बचाने के लिए कार्य किया।
विधान परिषद में कोरोना संकट पर सपा सदस्यों के लाए कार्य स्थगन प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार ने संकट के दौर में जीवन और जीविका, दोनों बचाने के लिए कार्य किया। कोरोना वायरस ने देश के सभी राज्यों और दुनिया के सभी देशों में कहर बरपाया। शुरुआत में यूपी में कोरोना के टेस्टिंग की सुविधा नहीं थी। लेकिन, आज हम देश में सर्वाधिक 7 करोड़ टेस्ट कर चुके हैं। पिछली सरकारों के ध्यान न देने से एक भी लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस नहीं थी। अब प्रत्येक जिले में 3-6 तक लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस उपलब्ध करा दी गई हैं।
सपा सदस्यों के आरोपों का जवाब देते हुए सीएम ने कहा कि हमें कोरोना संक्रमण की तीव्रता को भी देखना होगा। डेल्टा वैरिएंट ने पूरी दुनिया में कहर बरपाया। हमारे लिए एक भी मौत दुख की बात है। लेकिन, अमेरिका में भारत की तुलना में डेढ़ गुना मौतें हुईं। देश की बात करें तो जनसंख्या में कम होते हुए भी महाराष्ट्र में यूपी से दो गुना मौतें हुईं। दिल्ली में भी कहीं ज्यादा मौतें हुईं। विपक्ष को यही आइना देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव न्यायालय के आदेश पर कराए गए। सरकार इसे छह महीने से ज्यादा नहीं टाल सकती थी।
उन्होंने कहा कि एनएचएम से एंबुलेंस सेवा 102 और 108 शुरू करने के लिए पैसे दिए गए थे। किसी ने अपने घर से पैसे नहीं लगाए। वर्ष 2017 से पहले यूपी में सिर्फ 12 मेडिकल कॉलेज थे। हम 33 मेडिकल कॉलेज बनवा रहे हैं। पहले की सरकारों ने ध्यान दिया होता तो यहां के कामगारों को दूसरे राज्यों में जाकर काम करने की जरूरत न होती। 70 वर्र्षों की अकर्मण्यता और भ्रष्टाचार का ही यह नतीजा है। कोरोना की लहर के दौरान 40 लाख से अधिक कामगार वापस आए। उनके लिए सरकार ने सभी जरूरी प्रबंध किए। सीएम ने कहा कि कोरोना संकट काल में जहां लोगों को मुफ्त राशन दिया, वहीं उनके खातों में पेंशन भी भेजी। 119 चीनी मिलों को खेत में गन्ना खड़े रहने तक चलवाया। वर्ष 2017 के पहले यूपी वाले ही बाहर जाकर प्रदेश का नाम नहीं लेते थे। अब गर्व से कहते हैं कि हम यूपी वासी हैं।
तीन तरह से होता है अंतिम संस्कार
गंगा किनारे शवों को दफनाने संबंधी बात पर कहा कि भारतीय परंपरा में अंतिम संस्कार के लिए भू समाधि, जल समाधि और अग्नि संस्कार प्रचलित हैं। सीएम ने कहा कि विपक्ष उस समय होम आइसोलेशन में था। इसलिए उनके पास प्रचार करने के लिए कोई और मुद्दा नहीं था। इस पर सपा के नरेश उत्तम ने टोकते हुए कहा कि होम आइसोलेशन की व्यवस्था तो सरकार ने ही दी थी।
हर सदस्य के फोन का दिया जवाब
सीएम ने कहा कि कोरोना संकट के दौरान उन्होंने हर सदस्य के फोन का जवाब दिया। सपा सदस्य शतरुद्र प्रकाश ने फोन किया तो उनकी भी सुनी। अब कहेंगे कि शतरुद्र प्रकाश बीजेपी में जा रहे हैं। दूसरी लहर के दौरान एक साथ बड़ी संख्या में लोगों को ऑक्सीजन की जरूरत पड़ी, जिससे दिक्कत हुई। लेकिन, इस पर यथासंभव कम समय में काबू पा लिया गया। यूपी के मॉडल को डब्ल्यूएचओ ने भी सराहा। इस दौरान कुछ लोगों की भूमिका काफी नकारात्मक रही, जिसकी समीक्षा समय करेगा।
रिकवरी रेट सबसे ज्यादा
योगी ने कहा कि यह माहमारी अभी समाप्त नहीं हुई है। सरकार ने चुनाव ड्यूटी के दौरान कोरोना संक्रमण से मौत होने पर गाइडलाइंस में बदलाव किया, ताकि कार्मिकों को लाभ मिल सके। यूपी में पॉजिटिविटी रेट सबसे कम और रिकवरी रेट सबसे ज्यादा रहा। अब तक छह करोड़ लोगों को प्रदेश में वैक्सीन लग चुकी है। इसलिए विपक्षी सदस्यों के आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है।