लखनऊ को स्मार्ट बनाने के लिए सरकार ने 374 करोड़ रुपये दिए, लेकिन दो साल में महज 3.50 करोड़ ही खर्च हुए। यह भी विकास कार्य पर नहीं बल्कि प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट कंपनी को वेतन देने पर।
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शहर को स्मार्ट बनाने की कवायद में सुस्ती पर मुख्यमंत्री ने कड़ी नाराजगी जताते हुए 15 दिन में काम की प्रगति बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही रिपोर्ट भी तलब की है।
दो साल पहले लखनऊ को स्मार्ट सिटी योजना में चुना गया था। उस समय उम्मीद जगी थी अब पूरा शहर चमक जाएगा। राजधानी को स्मार्ट बनाने को लेकर जो 2055 करोड़ का बजट तैयार किया गया है, उसमें करीब 1700 करोड़ के काम अमृत मिशन, स्वच्छ भारत मिशन या अन्य दूसरी योजना के जरिये होने हैं। ये काम दूसरे विभागों को कराने हैं।
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स्मार्ट सिटी योजना के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार की ओर से दो साल में 374 करोड़ रुपये का बजट भी जारी किया गया है। लेकिन सुस्त सरकारी सिस्टम अब तक विकास की एक ईंट भी नहीं रख सका है। जारी बजट की एक प्रतिशत राशि भी खर्च नहीं हो सकी।
15 दिन में कार्यो में तेजी लाने के दिए निर्देश
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- फोटो : डेमो
योजनाएं कागज पर और करोड़ों का बजट खाते में पड़ा हुआ है। अब जब मुख्यमंत्री ने नाराजगी जताई तो मंडलायुक्त व स्मार्ट सिटी बोर्ड अध्यक्ष अनिल गर्ग ने 15 दिन में कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।
साथ ही इसकी रिपोर्ट भी मांगी है। स्मार्ट सिटी योजना के तहत इंटीग्रेटेड कमांड कंट्रोल सिस्टम बनाने की बात हुई। जहां से ट्रैफिक, पुलिस, सिटी ट्रांसपोर्ट, स्ट्रीट लाइट, वाटर सप्लाई, कचरा प्रबंधन, जनसुविधा केंद्र, वायु और ध्वनि प्रदूषण से जुड़े विभागों पर नियंत्रण रखा जाए और वहां से उन्हें निर्देश जारी किया जाए।
इससे शहरवासी एक ही जगह पर हर समस्या के समाधान को संपर्क कर सकें। उन्हें हर शिकायत और सुविधा के लिए अलग-अलग विभागों के कंट्रोल रूम में संपर्क न करना पड़े। कैसरबाग को मॉडल के रूप में विकसित किया जाना है।
इन विभागों के चक्कर में अटके प्रोजेक्ट
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24 घंटे पानी की सप्लाई होगी। इसके लिए अलग जोनल स्टेशन बनाया जाएगा। सीवरेज सिस्टम को भी सेंसर युक्त बनाया जाएगा, ताकि सीवर चोक होने पर इसकी जानकारी जलकल के कंट्रोल रूम तक पहुंच जाए और इसे सही कर लिया जाए।स्मार्ट सिटी के लिए सबसे पहले सीवर व पेयजल योजना पर काम होना है, लेकिन एक भी शुरू नहीं हो सका है।
दूसरे विभागों के चक्कर में अटके प्रोजेक्ट
- कैसरबाग को स्मार्ट सिटी में मॉडल के तौर पर विकसित करने के लिए चुना गया है। इसमें 21.41 करोड़ रुपये की लागत से पेयजल आपूर्ति सिस्टम को बेहतर बनाया जाना है, ताकि यहां 24 घंटे पानी मिले। इस काम के लिए बजट अमृत योजना से मांगा जा रहा है। इसके इंतजार में यह प्रोजेक्ट फंसा है।
- इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम पर 110 करोड़ रुपये खर्च होने हैं। हालांकि अभी तक स्मार्ट सिटी में इस बारे में प्रस्ताव ही नहीं बना कि वह संबंधित विभाग के साथ मिलकर खर्च में कितनी हिस्सेदारी करेगा।
ये प्रोजेक्ट भी हैं अधर में
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- शहर में पीएनजी नेटवर्क बढ़ाने के लिए 30.50 करोड़ रुपये का बजट खर्च किया जाना है, लेकिन अभी प्रोजेक्ट अधर में है। रोड कटिंग शुल्क को लेकर पीएनजी और नगर निगम के बीच विवाद है, जो अब तक हल नहीं हो पाया है।
- नाले ढकने के लिए स्मार्ट सिटी में 197 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान है। लेकिन इसे लेकर नगर निगम की ओर से अब तक कोई प्रस्ताव नहीं बनाया गया है।
- शहर में स्मार्ट बस शेल्टर बनाने के लिए 40 करोड़ के बजट का प्रावधान है। अब तक एक बस शेल्टर ही मॉडल के तौर पर बनाया गया है।
- स्मार्ट सिटी मिशन में मलिन बस्तियों में अवस्थापना सुविधाओं के विकास पर 11.40 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। लेकिन अब तक इसके बारे में नगर निगम की ओर से कोई प्रस्ताव ही तैयार नहीं किया गया।
फैक्ट फाइल
-1 अप्रैल 2016 को लखनऊ स्मार्ट सिटी में चुना गया।
- 6 अगस्त 2016 को एसपीवी (स्पेशल पर्पज व्हीकल) का गठन।
- स्मार्ट सिटी कार्ययोजना को चार थीम में बांटा गया- जीवंत लखनऊ, सुगम लखनऊ, स्वच्छ लखनऊ और समृद्ध लखनऊ
जल्द शुरू होंगे काम
स्मार्ट सिटी के रुके काम जल्द शुरू होंगे। शासन में भी बात की गई है। जो काम दूसरे दूसरी योजनाओं से होने हैं, उन्हें लेकर बजट जारी कराया जाएगा। नगर निगम स्तर पर योजनाओं की भी समीक्षा होगी। इसे लेकर जल्द बैठक भी होगी। - इंद्रमणि त्रिपाठी, नगर आयुक्त व मुख्य कार्यकारी निदेशक स्मार्ट सिटी