मुख्यमंत्री ने कहा कि सपा सरकार में आतंवादियों ने मध्यकाल की याद ताजा कर दी थी। मठों, मंदिरों पर हमले होते थे और हिन्दू समाज की भावनाओं पर कुठाराघात कर रौंदा जा रहा था। उन्होंने कहा कि मऊ में 2005 में भरत मिलाप के दौरान व्यापक दंगे हुए। 2007 में आजमगढ़ के शिबली कालेज में वंदे मातरम गान की मांग करने पर अजित राय की हत्या की गई थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2012 में जब सपा की सरकार बनी तो सबसे पहले आतंकियों पर दर्ज मुकदमे वारपस लिए गए। वहीं 2017 में भाजपा की सरकार बनने पर सबसे पहला निर्णय किसानों की कर्जमाफी का लिया गया। उन्होंने कहा कि भारत के टुकड़े-टुकड़े की मंसा रखने वाले लोग सपा अध्यक्ष से मिलने क्यों आते है? सम्मेलन को पर्यावरण एवं वन मंत्री दारा सिंह चौहान, पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री अनिल राजभर, पिछड़ा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष प्रभुनाथ चौहान, प्रदेश मंत्री मोहन सिंह और ब्लाक प्रमुख रामभरोसे चौहान ने भी संबोधित किया।
पिछड़ों के विकास की नीयत नहीं थी
मुख्यमंत्री ने कहा कि लूनिया चौहान समाज को सोचाना होगा कि आजादी के बाद उनके समाज से कोई व्यक्ति राज्यपाल क्यों नहीं बना। भाजपा सरकार ने ही पहली बार फागू सिंह चौहान को बिहार का राज्यपाल बनाया। सपा, बसपा और कांग्रेस में पिछड़े वर्ग के विकास की नीयत नहीं थी। उन्होंने कहा कि तीनों ही दल नहीं चाहते थे कि पिछड़े वर्ग के लोग भी मुख्य धारा से जुड़ें। प्रदेश सरकार में दारा सिंह चौहान बड़ा मंत्रालय संभाल रहे है। प्रभुनाथ चौहान पिछड़ा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष हैं। उन्होंने पिछड़े वर्ग की भावी पीढ़ी के भविष्य के लिए यूपी में एक बार फिर भाजपा की सरकार बनने की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि समाज के लोग एक-एक परिवार के पास जाकर बताएं कि देश व प्रदेश के हित में भाजपा की सरकार आवश्यक है।