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Lucknow News: विवादित ढांचों के पास फारसी शिलापट मिलने का दावा

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कसमंडी कलां का विवादित ढांचा।
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लखनऊ। मलिहाबाद स्थित कसमंडी कलां स्थित विवादित ढांचों के पास मुस्लिम समुदाय के लोग लंबे समय से नमाज अदा करते आए हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि ढांचे के पास सफाई और उसकी देखरेख मुस्लिम समुदाय के लोग ही करते रहे हैं। दोनों ढांचों के पास ही करीब 18 बीघे में कब्रिस्तान भी है।
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मुस्लिम समुदाय की ओर से दावा किया गया है कि एक हफ्ते पहले सफाई के दौरान उन्हें सफेद फारसी शिलापट मिला था, जिस पर 1246 का जिक्र है और उस पर मर्सिया (शोकगीत) लिखा हुआ है। इस वजह से यहां मकबरे और मस्जिद का ही स्वरूप है। पुरातत्व विभाग ने भी प्रथम सर्वे में ढांचे के अंदर कब्र और इसका स्वरूप मस्जिद बताया है।
उधर, लाखन और सुहेलदेव आर्मी का दावा है कि यह स्थल 11वीं सदी के प्रतापी नागवंशी शासक महाराजा कंसा पासी का ऐतिहासिक किला और प्राचीन शिव मंदिर था। ढांचों की दीवारों व खंभों पर प्राचीन हिंदू स्थापत्य कलाकृतियां अंकित है।
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कसमंडी कला के जिला पंचायत सदस्य पन्ना लाल रावत ने बताया कि दो वर्ष पहले से मुस्लिम समाज के लोग नमाज अदा करते रहे हैं, लेकिन क्षेत्र महाराजा कंसा पासी का बसाया हुआ है। दोनों समुदाय के दावों के बीच बहरहाल शांति व्यवस्था कायम है। यहां पुलिस बल की संख्या में कमी कर दी गई है और निगरानी से ड्रोन को भी हटा दिया गया है।
मंदिर का दावा करने वाले संगठन की कार्बन डेटिंग की मांग
मंदिर का दावा करने वाले संगठन कार्बन डेटिंग की मांग कर रहे हैं। पुरातत्व विभाग के अनुसार, कार्बन डेटिंग के लिए विशेष तरह के उपकरण की जरूरत पड़ती है। विभाग की ओर से यह कराना संभव नहीं है। बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान, वैज्ञानिक अनुसंधान संस्थान व अन्य प्रमुख संस्थानों के माध्यम से ही कार्बन डेटिंग संभव है। कार्बन डेटिंग की बात करें तो यूपी के सनौली बागपत के कब्रिस्तान और प्राचीन रथ की कार्बन डेटिंग हुई थी। इसी तरह वाराणसी की ज्ञानवापी, संभल की प्राचीन मंदिर, लहुरादेवी संत कबीर नगर में भी कार्बन डेटिंग हुई है।
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