लखनऊ। गैस, डीजल के बाद व्यापारियों को अब महंगी बिजली से बड़ा झटका लगा है। बिजली निगम ने बिजली बिल में फ्यूल सरचार्ज पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने का निर्णय लिया है। यह शुल्क जून के बिल में जुड़कर आएगा। इससे पूरा बिजली बिल 3-4 प्रतिशत बढ़कर आएगा। इस महंगाई से खान-पान कारोबार से जुड़े व्यवसायी ज्यादा प्रभावित होंगे, क्योंकि वे बड़े इंडक्शन, इलेक्ट्रिक या एयर फ्रायर पर आश्रित हैं। आटा चक्की और अन्य कारखाना मालिकों की लागत भी बढ़ गई है।
डीजल भट्ठी और बेकरी इकाइयों के मोटर बिजली से चलते हैं। बेकरी और ब्रेड में बिजली का अधिक उपयोग होता है। बाजार में ग्राहक कम हैं, इसलिए वे दाम नहीं बढ़ा सकते। सारी गाज व्यापारियों पर ही गिर रही है।
- अविनाश त्रिपाठी, प्रदेश प्रभारी (स्वीट्स एंड रेस्टोरेंट प्रकोष्ठ), आदर्श व्यापार मंडल
सरकार रातों-रात दाम बढ़ा देती है। व्यापारी तुरंत उत्पादों की कीमत नहीं बढ़ा सकते। अधिकतम खुदरा मूल्य से ज्यादा वसूलना संभव नहीं होता। लागत बढ़ने से मुनाफा घट रहा है।
- रितेश श्रीवास्तव, दवा कारोबारी व उद्यमी
बिजली कटौती से व्यापार प्रभावित हो रहा है। बिक्री घट रही है। पुराने लखनऊ में जर्जर बिजली के खंभों एवं कम क्षमता वाले ट्रांसफार्मरों के कारण दुर्घटनाओं का खतरा बना हुआ है। रेट बढ़ाने के बजाय बाजारों में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
- अमरनाथ मिश्र, अध्यक्ष, लखनऊ व्यापार मंडल
प्रदेश में पहले से ही बिजली महंगी है। बिहार और दिल्ली में कुछ इकाइयों तक बिजली मुफ्त दी जा रही है। इस्राइल-ईरान युद्ध के कारण प्रभावित व्यापार को देखते हुए दरें वापस ली जानी चाहिए।
ज्ञानेश मिश्र, प्रदेश अध्यक्ष, भारतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल
अभी तक पांच रुपये किलो पिसाई ली जा रही थी, लेकिन अब एक रुपये किलो बढ़ाना पड़ेगा, क्योंकि हमारा ही मासिक खर्च 3500-4000 रुपये तक बढ़ जाएगा। इससे आटा भी एक से दो रुपये किलो महंगा होगा।
- संतोष गुप्ता, न्यू हैदराबाद