कोरोना की दूसरी लहर के दौरान मुख्यमंत्री योगी की भूमिका से 45 फीसदी लोग बहुत ज्यादा संतुष्ट और 28 फीसदी लोग कुछ हद तक संतुष्ट रहे। वहीं 20 फीसदी लोगों ने असंतुष्टि जताई है।
योगी आदित्यनाथ सरकार कोरोना की दूसरी लहर के दौरान और दूसरी लहर के बाद यूपी के हालात को तेजी से बदलने में सफल हुई। इसी तरह कोरोना की दूसरी लहर के दौरान मुख्यमंत्री की भूमिका से 45 फीसदी लोग बहुत ज्यादा संतुष्ट और 28 फीसदी लोग कुछ हद तक संतुष्ट रहे। वहीं 20 फीसदी लोगों ने असंतुष्टि जताई है।
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यह दावा सोशल मीडिया पर एक सर्वे में किया गया है। सर्वे में दावा किया गया है कि 2022 में विधानसभा चुनाव में मतदान का आधार क्या होगा? इस सवाल पर सबसे ज्यादा 22 फीसदी लोगों ने कहा कि मुख्यमंत्री उम्मीद्वार, दूसरे नंबर पर 12 फीसदी ने सरकार के कामकाज के आधार पर वोट की बात कही। केवल 10 फीसदी लोगों ने पार्टी के आधार पर वोट करने की बात कही है।
सर्वे के मुताबिक वर्तमान और दो पूर्व मुख्यमंत्रियों के कामकाज पर सवाल हुआ तो 22 फीसदी लोगों ने अखिलेश यादव, 28 फीसदी ने मायावती और 46 फीसदी ने योगी आदित्यनाथ को बेहतर मुख्यमंत्री बताया। सर्वे में दावा किया गया है कि कोरोना के दौरान मई, 2021 में अगर विधानसभा चुनाव होते तो भाजपा को 178 से 182 सीटें ही मिलतीं। जुलाई के पहले हफ्ते में चुनाव होते तो भाजपा को 278 से 288 सीटें और 43 फीसदी वोट मिलता।
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सर्वे में यह भी दावा है कि अब भी 64 फीसदी ब्राह्मण भाजपा के साथ हैं जबकि ब्राह्मणों की दूसरी पसंदीदा पार्टी बसपा फिर कांग्रेस है। इस दौड़ में सपा सबसे पीछे है। इसी तरह दलित वोटरों के बीच बसपा 45 फीसदी के साथ सबसे आगे है जबकि दूसरे नंबर पर 43 फीसदी दलित वोटर भाजपा के साथ जा रहे हैं।