दिवाली में पटाखों से होने वाले वायु प्रदूषण को देखते हुए गृह विभाग ने शुक्रवार को पटाखा बिक्री के लिए नई गाइड लाइन जारी की है। इसके मुताबिक इस बार पिछले साल की तुलना में अस्थाई लाइसेंसों की संख्या आधी कर दी गई है। इस साल 50 फीसदी कम लाइसेंस दिए जाएंगे।
साथ ही चीनी समेत अन्य इम्पोर्टेड पटाखे की बिक्री प्रतिबंधित रहेगी। एनसीआर क्षेत्र में आने वाले गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, बागपत, मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर व मुजफ्फरनगर में दिवाली पर आतिशबाजी की वजह से बढ़ते प्रदूषण पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी।
इस पर कोर्ट ने पटाखों की बिक्री कम करने का निर्देश दिया है। इसे देखते हुए गृह सचिव ने एनसीआर सात जिलों समेत पूरे प्रदेश में पटाखे के लाइसेंस की संख्या आधी करने को कहा है। गृह सचिव भगवान स्वरूप के अनुसार आने वाले समय में इसमें और कमी की जाएगी।
नई गाइड लाइन के मुख्य बिंदु
डेमो
साइलेंस जोन में आने वाले स्कूल, अस्पताल, न्यायालय, धार्मिक स्थल के 10 मीटर के भीतर पटाखा फोड़ने पर प्रतिबंध।
विदेशों में बने पटाखों के लिए लाइसेंस नहीं जारी किए जाएंगे।
सिर्फ उन्ही पटाखों की बिक्री होगी, जिनका निर्माण पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव सेफ्टी आर्गेनाइजेशन (पीएफएसओ) द्वारा तय मानक के मुताबिक एल्युमिनियम, सल्फर, पोटैशियम व वेरियम से किया गया हो।
एंटीमनी, लिथियम मर्करी, आर्सेनिक, लेड और स्ट्रान्सियम क्रोमेड से बनी आतिशबाजी की बिक्री प्रतिबंधित।