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खुशखबरीः पीजीआई में आधी कीमत में होगा लिवर ट्रांसप्लांट

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लिवर ट्रांसप्लांट की बाट जोह रहे मरीजों के लिए संजय गांधी पीजीआई से राहत भरी खबर है। यहां ट्रांसप्लांट का खर्च 12-15 लाख रुपये ही आ रहा है जबकि देश भर में निजी संस्थानों में इसी ट्रांसप्लांट पर 23 से 50 लाख रुपये का खर्च आता है। यह दावा किया है संस्थान के विशेषज्ञों का।
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एसजीपीजीआई में अभी हर महीने आठ लिवर ट्रांसप्लांट करने की क्षमता है। नई यूनिट बनने के बाद महीने में 16 ट्रांसप्लांट किए जा सकेंगे। इससे सूबे के मरीजों को दिल्ली व दक्षिण भारत के निजी अस्पतालों की दौड़ भी नहीं लगाना पडे़गा।

एसजीपीजीआई सर्जिकल गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी विभाग के हेड व लिवर ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ प्रो.राजन सक्सेना के अनुसार यहां विभाग में 60 मरीज भर्ती रहते हैं। इनमें से 36 से 40 मरीजों को लिवर सिरोसिस यानी लिवर की कोशिकाओं की खराबी से संबंधित बीमारी की वजह से ट्रांसप्लांट की जरूरत होती है।
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विशेषज्ञों के मुताबिक अभी लिवर ट्रांसप्लांट की व्यवस्था ज्यादातर निजी संस्थानों में ही है। नोएडा, दिल्ली, गुड़गांव के बाद ट्रांसप्लांट करने वाले ज्यादातर निजी संस्थान दक्षिण भारत के हैं। लिहाजा मरीज को इन संस्थानों के चक्कर तो लगाने ही पड़ते हैं खर्च भी ज्यादा करना पड़ता है।
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12 साल में तीन गुना बढ़ गया खर्च

संजय गांधी पीजीआई में 12 साल पहले लिवर ट्रांसप्लांट पर मरीज का खुल खर्च चार लाख रुपये आता था। यह खर्च भी देश में सबसे कम था।

लिवर ट्रांसप्लांट सबसे गंभीर सर्जरी है। कैडवर (दान में मिली देह) से लिवर लेकर सिर्फ 6 से 12 घंटे तक ही सुरक्षित रखा जा सकता है। इसलिए इसी दौरान प्रत्यारोपण करना जरूरी होता है।

एसजीपीजीआई में अब तक 20 लिवर प्रत्यारोपण किए जा चुके हैं। इनमें से नौ पूरी तरह से सफल रहे। प्रो. राजन सक्सेना ने बताया कि विश्व में जहां भी प्रत्यारोपण सफल हो रहा है वहां के पहले 35 प्रत्यारोपण को देखें तो एसजीपीजीआई सबसे ऊपर है।

सरकारी क्षेत्र के पांच चिकित्सा संस्थानों में लिवर ट्रांसप्लांट हो रहा है। एसजीपीजीआई, इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बाइलियरी साइंसेज, एम्स दिल्ली, पीजीआई चंडीगढ़ और केईएम मुंबई। इनमें से एसजीपीजीआई, आईएलबीएस व एम्स लिविंग डोनर ट्रांसप्लांट करते हैं।

जबकि पीजीआई चंडीगढ़ और केईएम मुंबई ने कैडवर ट्रांसप्लांट किए हैं। लिविंग में सबसे कम शुल्क में ट्रांसप्लांट की सुविधा एसजीपीजीआई में ही है। प्राइवेट हॉस्पिटल में ट्रांसप्लांट पैकेज की शुरुआत 23 लाख से करते हैं, लेकिन मरीज डिस्चार्ज होने तक ये 46 से 50 लाख रुपये तक पहुंच जाता है।
प्रो. राजन सक्सेना,हेड, सर्जिकल गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी
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