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गर्भावस्था में भूलकर भी ना कराएं ये जांच

Mon, 20 Apr 2015 02:11 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,लखनऊ
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गर्भावस्था में सरवाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग नहीं करना चाहिए क्योंकि प्रसव के छह सप्ताह बाद रिपोर्ट बदल जाती है। गर्भावस्था में हार्मोंस परिवर्तन के कारण बच्चेदानी का मुंह कैंसर जैसा दिखने लगता है।
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ऐसे जो भी रिपोर्ट छह सप्ताह बाद आए उसका तीन माह बाद दोबारा जांच जरूरी है। इसके बाद ही कैंसर की सर्जरी करनी चाहिए। यह जानकारी यूके की डॉ. क्रिस्टीन ने रविवार को इंडियन सोसाइटी ऑफ कॉल्पोस्कोपी सर्वाइकलपैथोलॉजी (आईएससीसीपी)-2015 की 10वीं कॉन्फ्रेंस में दी।

डॉ. क्रिस्टीन ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान संक्रमण की आशंका भी होती है। बार-बार प्रसव या फिर गर्भपात से भी ह्यूमन पेपिलोमा वायरस (एचपीवी) का संक्रमण हो सकता है।
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खुद भी कर सकती है वजाइना से कैंसर की जांच

लंदन से आई केजीएमयू की पूर्व छात्र रहीं डॉ. नूरीन खान ने बताया कि कैंसर की स्क्रीनिंग में बहुत सारी अड़चने हैं। स्टाफ,पैसे की कमी, जांच में भिन्नता इसमें मुख्य हैं। अब ऐसी एचपीवी किट आ गई हैं। जिससे महिलाएं खुद सरविक्स और वजाइना से स्मीयर लेकर परीक्षण कर सकती हैं।

डॉ. नूरीन ने बताया कि आने वाले समय में यूरिन टेस्ट से एचपीवी का पता लगाया जा सकेगा।डॉ. स्मिता जोशी ने बताया कि एचआईवी पॉजिटिव महिलाओं में एचपीवी संक्रमण व कैंसर की आशंका अधिक होती है। इसलिए ऐसे मरीजों को 25 वर्ष की आयु से प्रति वर्ष स्क्रीनिंग कराने की आवश्यकता होती है।

अगर काल्पोस्कोपी व बायोप्सी में सीआईएन-3 आए तो कैंसर ग्रस्त हिस्से को तुरंत काट कर निकाल देना चाहिए। डॉ. किरन पांडेय ने बताया कि लो-ग्रेड या सीआईएन1 से ज्यादा खुदबखुद ठीक हो जाता है। इसलिए दो वर्ष तक इंतजार करने के बाद ही इसका इलाज करना चाहिए।
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टीकाकरण से रोका जा सकता है ये कैंसर

विश्व स्वास्थ्य संगठन के पब्लिक हेल्थ विशेषज्ञ डॉ. संजय गांधी ने बताया कि अगर महिला को एचपीवी इंफेक्शन नहीं है तो टीकाकरण 100 फीसदी प्रभावी है।

15 वर्ष की आयु से कम उम्र में एचपीवी टीकाकरण की दो खुराक पर्याप्त है। अगर उम्र 15 वर्ष से अधिक है तो टीकाकरण की तीन खुराक 0-1, 2-6 महीने के अंतराल में अवश्य कराना चाहिए। टीकाकरण ही इस बीमारी को रोकने का सबसे कारगर तरीका है।

यूके की डॉ. डायना हैमिंग ने बताया कि एचपीवी का पता लगाने के लिए अगर किसी महिला में डीएनए टेस्ट व साइटोलॉजी भी निगेटिव है तो 99 फीसदी संभावना है कि उस महिला को एचपीवी संक्रमण नहीं है।

उन्होंने बताया कि एक नया मार्कर पी-16 सरवाइकल प्री-कैंसर अवस्था का पता लगाने में सहायक हो रहा है। डॉक्टर जेम्स वेंटले ने बताया कि यदि महिला की जांच में लो ग्रेड या एक्सस या एचपीवी डीएनए पॉजिटिव आता है तो काल्पोस्कोपी अवश्य करें।
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