बिजली उत्पादक कंपनियां अब पावर एक्सचेंज में 12 रुपये प्रति यूनिट से ज्यादा कीमत पर बिजली नहीं बेच सकेंगी। राज्य सरकार की सिफारिश पर केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (सीईआरसी) ने पावर एक्सचेंज में बेची जाने वाली बिजली की अधिकतम कीमत 12 रुपये यूनिट तय कर दी है। इससे यूपी समेत उन राज्यों की विद्युत वितरण कंपनियों को बड़ी राहत मिलेगी, जहां बिजली की कमी के कारण पावर एक्सचेंज से महंगी बिजली खरीदनी पड़ती है।
दरअसल कोयले की कमी या अन्य किन्हीं कारणों से बिजली की किल्लत होने पर तमाम बिजली उत्पादक कंपनियां पावर एक्सचेंज में 20 रुपये प्रति यूनिट तक बिजली बेचती हैं। इसकी वजह से विद्युत वितरण कंपनियों को 20 रुपये प्रति यूनिट से अधिक दर पर बिजली खरीदनी पड़ती है। पिछले साल कोयले का संकट होने पर यूपी को काफी महंगी दर पर बिजली खरीदनी पड़ी थी।
अक्तूबर 2021 में राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने बिजली उत्पादक कंपनियों और पावर एक्सचेंज पर मुनाफाखोरी का आरोप लगाया था। साथ ही सरकार से पावर एक्सचेंज में बिजली बेचने की अधिकतम दर करने की मांग की थी। इस पर पूर्व ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह को पत्र भेजकर इसकी सिफारिश की थी।
केंद्रीय ऊर्जा मंत्री के हस्तक्षेप के बाद सीईआरसी के अध्यक्ष पीके पुजारी व तीन सदस्यों की पूर्ण पीठ ने पावर एक्सचेंज में बिजली बेचने की अधिकतम दर 20 रुपये प्रति यूनिट से घटाकर 12 रुपये प्रति यूनिट करने का आदेश जारी कर दिया है। यह कानून तत्काल प्रभाव से पूरे देश के लिए लागू कर दिया गया है। सीईआरसी के इस फैसले से अब विद्युत वितरण कंपनियों को 12 रुपये प्रति यूनिट से ज्यादा दर पर बिजली नहीं खरीदनी पड़ेगी। इससे आम उपभोक्ताओं की बिजली दरों में भी बहुत बढ़ोतरी की गुंजाइश नहीं रहेगी।
12 रुपये प्रति यूनिट भी है ज्यादा : उपभोक्ता परिषद
विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने इस फैसले के लिए पूर्व ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा, केंद्रीय ऊर्जा सचिव आलोक कुमार और सीईआरसी के प्रति आभार व्यक्त किया है। उनका कहना है कि वे पावर एक्सचेंज में बिजली बेचने की दरों में और कमी के लिए लड़ाई जारी रखेंगे। बिजली की दर 12 रुपये प्रति यूनिट भी ज्यादा है, यह किसी हाल में 6 रुपये प्रति यूनिट से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।